बॉन्ड बाजार से ट्रंप को चुनौती: 4.44% से ऊपर पहुंची ब्याज दर, मध्यावधि चुनावों में रिपब्लिकन पर मंडराया खतरा
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन को ऋण देने को लेकर दुनिया भर में सतर्कता बढ़ रही है। इसके चलते ब्याज दरें इस तरह बढ़ रही हैं कि सामर्थ्य पर दबाव बढ़ रहा है, आर्थिक विकास बाधित हो रहा है व नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी के लिए एक नया संकट पैदा हो रहा है। ईरान युद्ध के कारण ऊर्जा के दामों में हुई भारी वृद्धि का असर उन बॉन्डों के मूल्य पर भी पड़ा है जिनसे अमेरिकी सरकार वित्त पोषित होती है। ट्रंप के लिए यह बड़ी चुनौती है। 10 साल के अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड पर ब्याज दर 4.44% से ऊपर पहुंच गई है, जो फरवरी में युद्ध प्रारंभ से पहले 3.95% थीं। औसत बंधक दरें 9 माह में शीर्ष पर हैं, जबकि ऑटोमोबाइल की बिक्री घटी है। यह वैश्विक चुनौती है, क्योंकि कई देशों में ब्याज दरें बढ़ी हैं। दुनिया बढ़ती मुद्रास्फीति की संभावना, सरकारी ऋण की स्थिरता पर बढ़ते सवालों और एआई में निवेश में भारी उछाल के अनुरूप खुद को ढाल रही है। ट्रंप ने 1.8 खरब डॉलर के वार्षिक बजट घाटे को कम करने की योजना बताकर अमेरिकियों को भले ही साधने का प्रयास किया लेकिन अर्थशास्त्रियों का कहना है कि घाटे को कम करने के लिए ट्रंप की रणनीतियों से अपेक्षित नतीजों की संभावना नहीं है। राष्ट्रीय ऋण चुकाने की लागत बढ़ी ब्रूकिंग्स इंस्टीट्यूशन में बजट और कर विशेषज्ञ जेसिका रीडल ने कहा, राष्ट्रीय ऋण चुकाने की लागत 2021 से तीन गुना बढ़कर सालाना 1 खरब डॉलर से बढ़ गई है। राष्ट्रपति ट्रंप ने कर कटौती विधेयक पर हस्ताक्षर किए हैं जिससे 10 साल के घाटे में 5 खरब डॉलर की वृद्धि होने की संभावना है और टैरिफ इन लागतों के सिर्फ एक छोटे से हिस्से की भरपाई कर रहे हैं। वह बोले, अगले दशक में घाटा और बढ़ेगा, क्योंकि सामाजिक सुरक्षा की लागत कर राजस्व से अधिक हो जाएगी। नीतियां जिम्मेदार अमेरिकी ट्रेजरी की 10 साल की ब्याज दर मई मध्य में 4.67% तक चढ़ीं और ईरान युद्धविराम पर चर्चा के चलते इसमें गिरावट आई है। ठीक वैसे ही जैसे ट्रंप के कारण 2025 में दरें शुरू में बढ़ी थीं। इसकी जिम्मेदार अमेरिकी नीतियां रहीं। विशेषज्ञों में चिंता जॉर्ज डब्ल्यू बुश प्रशासन के दौरान व्हाइट हाउस काउंसिल ऑफ इकोनॉमिक एडवाइजर्स के पूर्व अध्यक्ष ग्लेन हबर्ड को चिंता है कि अमेरिका के पास अब 2008 के आर्थिक संकट या कोरोना वायरस महामारी जैसे आर्थिक संकट से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए पहले जैसी उधार लेने की क्षमता नहीं रह गई है। कोलंबिया विवि के बिजनेस स्कूल में प्रोफेसर हबर्ड ने कहा, मुझे नहीं लगता कि हमारे पास इससे निपटने के लिए 2008 या 2020 जैसा अवसर है।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Jun 02, 2026, 05:13 IST
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