CM Yogi-Mohan Bhagwat Meeting: CM योगी और मोहन भागवत की मुलाकात क्या संकेत दे गई?
प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार और संगठन में संभावित फेरबदल की चर्चाओं के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह मोहन भागवत से मुलाकात ने सियासी पारे को चढ़ा दिया है। राजधानी लखनऊ के निराला नगर स्थित संघ कार्यालय परिसर में सरस्वती शिशु मंदिर में हुई यह मुलाकात भले ही “शिष्टाचार भेंट” बताई जा रही हो, लेकिन इसके समय और परिस्थितियों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। बुधवार रात करीब आठ बजे हुई इस मुलाकात में दोनों नेताओं के बीच लगभग 35 मिनट तक बंद कमरे में बातचीत हुई। संघ प्रमुख दो दिवसीय प्रवास पर राजधानी में थे और उसी दौरान मुख्यमंत्री का उनसे मिलना राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया। खास बात यह रही कि यह बातचीत पूरी तरह एकांत में हुई, जिसकी आधिकारिक जानकारी बेहद सीमित रखी गई। प्रदेश की राजनीति में इन दिनों कई स्तरों पर हलचल है। मंत्रिमंडल विस्तार, कुछ मंत्रियों के प्रदर्शन की समीक्षा और संगठनात्मक बदलाव को लेकर अंदरखाने चर्चाएं तेज हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री और संघ प्रमुख की मुलाकात को सामान्य शिष्टाचार भर मान लेना आसान नहीं है। सूत्रों का कहना है कि 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए संघ और सरकार के बीच समन्वय और रणनीति पर चर्चा स्वाभाविक है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संघ का फोकस हाल के महीनों में उत्तर प्रदेश पर बढ़ा हुआ दिख रहा है। संघ प्रमुख विभिन्न कार्यक्रमों के बहाने राज्य का दौरा कर रहे हैं और हर दौरे के दौरान मुख्यमंत्री से उनकी मुलाकात लगभग तय मानी जाती है। इससे संकेत मिलता है कि आने वाले चुनावी समीकरणों को लेकर संघ परिवार की भूमिका महत्वपूर्ण रहने वाली है। यह पहली बार नहीं है जब दोनों नेताओं के बीच लंबी बातचीत हुई हो। इससे पहले अयोध्या में श्रीराम मंदिर के शिखर पर 25 नवंबर को आयोजित धर्मध्वजा समारोह के बाद 26 नवंबर को मुख्यमंत्री और संघ प्रमुख के बीच करीब 90 मिनट तक चर्चा हुई थी। उस मुलाकात को भी औपचारिक बताया गया था, लेकिन राजनीतिक मायनों में उसे काफी अहम माना गया था। इसके अलावा 2024 के लोकसभा चुनाव परिणाम आने के बाद गोरखपुर में भी दोनों नेताओं की मुलाकात हुई थी। उस समय चुनावी प्रदर्शन और भविष्य की रणनीति को लेकर चर्चाएं हुई थीं। राजनीति के जानकारों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में 2027 का विधानसभा चुनाव केवल सत्ता का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति के भविष्य का भी संकेतक होगा। ऐसे में सरकार और संघ के शीर्ष नेतृत्व के बीच संवाद और समन्वय स्वाभाविक रूप से बढ़ेगा। हालांकि आधिकारिक तौर पर इसे महज शिष्टाचार मुलाकात बताया गया है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे आने वाले दिनों में बड़े फैसलों की भूमिका के रूप में देखा जा रहा है। क्या मंत्रिमंडल में बदलाव होगा क्या संगठन में नई जिम्मेदारियां तय होंगी इन सवालों के जवाब भले अभी पर्दे के पीछे हों, लेकिन इतना तय है कि इस 35 मिनट की मुलाकात ने प्रदेश की सियासत में नई चर्चा को जन्म दे दिया है।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Feb 19, 2026, 03:38 IST
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