AI Summit: वर्ष के अंत तक अंतरिक्ष में देश का पहला डाटा सेंटर होगा तैयार, निजी कंपनी ने दिखाया वास्तविक मॉडल
भारत की स्पेस टेक्नोलॉजी और एआई की दुनिया में इस साल के अंत तक एक क्रांतिकारी अध्याय जुड़ सकता है। एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स के नक्शेकदम अब भारतीय स्टार्टअप नीवक्लाउड और चेन्नई स्थित अग्निकुल कॉसमॉस अंतरिक्ष में भारत का पहला निजी ऑर्बिटल एआई डाटा सेंटर लॉन्च करने के लिए तैयार हैं। इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान नीवक्लाउड ने इसका वास्तविक वर्जन हॉल नंबर 4 में पेश किया है। कंपनी का कहना है कि इससे लागत बचेगी और डाटा प्रवाह तेजी होगा। इसके साथ ही यह प्राकृतिक आपदाओं के वक्त जमीन पर स्थापित डाटा सेंटर की तुलना में ज्यादा सुरक्षित होगा। जमीन की बाधाओं को पीछे छोड़ेगा अंतरिक्ष नीवक्लाउड के सीईओ व संस्थापक नरेंद्र सेन ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि पृथ्वी पर डाटा सेंटर बनाने में करीब 24 महीने का समय और भारी लागत लगती है। अंतरिक्ष में डाटा सेंटर होने से यह प्रक्रिया तेज और किफायती हो जाएगी। इसे पृथ्वी की निचली कक्षा (लोअर अर्थ ऑर्बिट) में 250 किमी की ऊंचाई पर तैनात किया जाएगा। यह पारंपरिक डाटा सेंटर्स की तुलना में डाटा प्रोसेसिंग को अधिक गति प्रदान करेगा। उन्होंने उदाहरण देकर बताया कि दिल्ली से मुंबई के बीच जमीन पर डाटा ट्रांसफर में 15-20 मिली सेकंड लगते हैं, वहीं अंतरिक्ष से यह काम मात्र 2.5 मिली सेकंड में संभव होगा। ये भी पढ़ें: गूगल डीपमाइंड के सीईओ हसाबिस बोले- विज्ञान-चिकित्सा में आएगी क्रांति, 5-8 साल में एजीआई बनेगा हकीकत स्वदेशी तकनीक और साझा हार्डवेयर इस मिशन की सबसे खास बात aकि इसमें अलग से सैटेलाइट भेजने के बजाय रॉकेट के ऊपरी हिस्से का ही डाटा सेंटर प्लेटफॉर्म के रूप में उपयोग किया जाएगा। इससे न केवल लागत कम होगी, बल्कि अंतरिक्ष में कचरा भी नहीं बढ़ेगा। मिशन के लिए 3डी-प्रिंटेड रॉकेट का इस्तेमाल होगा और पहला पायलट प्रोजेक्ट 2026 के अंत तक लॉन्च करने की योजना है।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Feb 19, 2026, 05:05 IST
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