Alert: बचपन की ये समस्या उम्र बढ़ने पर डिमेंशिया का बन सकती है कारण, सोचने-समझने की क्षमता भी हो जाती है कमजोर

अच्छी सेहत चाहते हैं तो लाइफस्टाइल और खानपान को ठीक रखना सबसे जरूरी माना जाता है। हम क्या खाते-पीते हैं, किस तरह का जीवन व्यतीत करते हैं इन सबका सेहत पर सीधा असर होता है। सोशल मीडिया और इंटरनेट की इस दुनिया में जीवन की गति को तो बढ़ा दिया है पर इसका दूसरा पहलू ये भी है कि इंसान भावनात्मक रूप से एक दूसर से दूर हो गया है। लिहाजा लोगों में अकेलापन यानी लोनलीनेस की भावना काफी बढ़ गई है। अध्ययनों से पता चलता है कि लगातार स्क्रीन टाइम, आमने-सामने की कम होती बातचीत और वर्चुअल दुनिया पर बढ़ती निर्भरता ने हर उम्र के लोगों में अकेलेपन की समस्या को तेज कर दिया है। इसके कारण तनाव, नींद में कमी, चिड़चिड़ापन और मानसिक थकान की समस्या तेजी से बढ़ती जा रही है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक पर अकेलेपन की स्थिति का नकारात्मक असर हो रहा है। इसी से संबंधित एक हालिया अध्ययन की रिपोर्ट में विशेषज्ञों ने अलर्ट किया है कि जिन लोगों का बचपन अकेलेपन की स्थिति में अधिक बीता है, उनमें डिमेंशिया का खतरा 41% तक बढ़ सकता है। इतनी ही नहीं बचपन में अकेलेपन की स्थिति समय के साथ-साथ सोचने-समझने की क्षमता भी कम कर देती है।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Nov 29, 2025, 10:00 IST
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