अध्ययन में चौंकाने वाले खुलासे: इमारतों में आग लगने पर युवा ज्यादा करते हैं देरी, तुरंत भागते हैं बुजुर्ग

रिहायशी इमारतों में आग लगने की स्थिति में लोगों का व्यवहार उनकी उम्र, पारिवारिक परिस्थितियों और पिछले अनुभवों से काफी प्रभावित होता है। बंगलूरू में किए गए एक नए अध्ययन में सामने आया है कि युवा आग लगने पर पहले स्थिति की पुष्टि करने, पड़ोसियों से पूछने या आग के स्रोत का पता लगाने की कोशिश करते हैं, जबकि बुजुर्ग लोग बिना देरी किए तुरंत सुरक्षित स्थान की ओर निकल जाते हैं। यह अध्ययन 30 हाई-राइज आवासीय इमारतों में रहने वाले लोगों पर आधारित है। इसे बंगलूरू के क्राइस्ट विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों द्वारा किया गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि उम्र, परिवार में कमजोर या आश्रित सदस्यों की मौजूदगी और आग से जुड़े पिछले अनुभव आग से सुरक्षा संबंधी व्यवहार को प्रभावित करने वाले सबसे महत्वपूर्ण कारक हैं। इसके विपरीत, लिंग, शिक्षा और सामान्य स्वास्थ्य स्थिति का लोगों के निर्णयों पर कोई महत्वपूर्ण प्रभाव नहीं पाया गया। अध्ययन के अनुसार, जिन लोगों ने पहले आग या धुएं से जुड़ी किसी घटना का अनुभव किया था, वे अलार्म बजते ही अधिक तेजी से प्रतिक्रिया देते हैं, निकासी मार्गों की बेहतर जानकारी रखते हैं और आपातकालीन सहायता लेने में भी अधिक सक्रिय होते हैं। प्रशिक्षण से बदलता है व्यवहार रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि आग से सुरक्षा का प्रशिक्षण पाने वाले लोग संकट की स्थिति में अधिक निर्णायक होते हैं। सर्वेक्षण में प्रशिक्षण प्राप्त 89 लोगों ने आग लगने पर तुरंत इमारत छोड़ने को प्राथमिकता दी, जबकि बिना प्रशिक्षण वाले लोगों में यह संख्या 75 रही। दूसरी ओर, अप्रशिक्षित लोग पड़ोसियों से पुष्टि करने, निर्देशों का इंतजार करने या अन्य विकल्पों में अधिक समय गंवाते हैं। ये भी पढ़ें:CAPF बिल का विरोध पड़ा भारी:CRPF के DIG निलंबित, 20 अफसरों का तबादला; अधिकारियों को प्रताड़ित करने का आरोप बच्चों व बुजुर्गों वाले परिवारों को रहता है अधिक जोखिम शोध में पाया गया कि जिन परिवारों में बच्चे, बुजुर्ग या दिव्यांग सदस्य हैं, उन्हें निकासी में अधिक समय लगता है। ऐसे परिवारों को अतिरिक्त सहायता, विशेष प्रशिक्षण और व्यक्तिगत निकासी योजनाओं की जरूरत होती है। शोधकर्ताओं का कहना है कि भारत में ऊंची इमारतों के लिए बनाई जाने वाली अग्नि सुरक्षा योजनाओं में सभी लोगों के व्यवहार को एक जैसा मान लिया जाता है, जबकि वास्तविकता इससे अलग है। अध्ययन के अनुसार, उम्र, अनुभव और पारिवारिक परिस्थितियों के आधार पर अलग-अलग निकासी रणनीतियां तैयार करने से आग जैसी आपदाओं में जान-माल के नुकसान को कम किया जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित मॉक ड्रिल, व्यावहारिक प्रशिक्षण और आयु-आधारित सुरक्षा योजनाएं भविष्य में हाई राइज इमारतों की अग्नि सुरक्षा को अधिक प्रभावी बना सकती हैं।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jun 24, 2026, 02:26 IST
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