CPEC: सीपीईसी तक पहुंची बलोच विद्रोह की आग, बीएलए के हमलों से चीन-पाकिस्तान परियोजनाओं का भविष्य अनिश्चित

चीनी बीआरआई की रीढ़ माना जाने वाला चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) गंभीर संकट में है। बलूचिस्तान में बलोच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) के हमलों, चीनी इंजीनियरों को निशाना बनाए जाने और पाकिस्तानी सेना की सीमित पकड़ के बीच अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक संस्थानों का आकलन है कि 5.17 लाख करोड़ रुपये से अधिक की चीनी परियोजनाएं अब सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि पूर्णतः सैन्य-सुरक्षा चुनौती बन चुकी हैं। इससे चीन-पाकिस्तान परियोजनाओं का भविष्य भी अनिश्चित हो गया है। ये भी पढ़ें:पीएम मोदी आज जाएंगे मलयेशिया:द्विपक्षीय रिश्ते होंगे मजबूत, ऐतिहासिक स्वागत से रिकॉर्ड बनाने का लक्ष्य बीएलए ने खारिज किया सेना का दावा, कहा-संघर्ष जारी है बलूचिस्तान। पाकिस्तानी सेना द्वारा बलूचिस्तान में विद्रोहियों की गतिविधियां खत्म करने के दावे को बलोच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने दुष्प्रचार कहा। बीएलए ने कहा, उसका ऑपरेशन हेरोफ-2 शुक्रवार को लगातार सातवें दिन में प्रवेश कर चुका है और संघर्ष जारी है। बीएलए प्रवक्ता जियांद बलोच ने कहा, पाकिस्तानी सेना के किसी भी दावे को तब तक झूठा माना जाना चाहिए जब तक कि बीएलए खुद इसकी समाप्ति की घोषणा नहीं कर दे। चीन ने दो विकल्प रखे चीन ने पाकिस्तान के सामने दो विकल्प रखे हैं। पहला, सीपीईसी की पूर्ण सुरक्षा के लिए पाकिस्तान स्वयं पर्याप्त संख्या में सेना तैनात करे। दूसरा, इस्लामाबाद औपचारिक रूप से बीजिंग से अनुरोध करे कि सीपीईसी परियोजनाओं की रक्षा के लिए चीन अपनी सैन्य टुकड़ियां बलूचिस्तान भेजे। दोनों ही विकल्प संवेदनशील हैं। ये भी पढ़ें:अमेरिका और भारत के बीच अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा जारी, कहा- इसे अंतिम रूप देने की दिशा में करेंगे काम भारत क्यों करता है सीपीईसी का विरोध भारत चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे पर मुख्य रूप से संप्रभुता, सुरक्षा और रणनीतिक संतुलन के कारण आपत्ति जताता है। सीपीईसी का एक बड़ा हिस्सा पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) से होकर गुजरता है, जो भारत का अभिन्न हिस्सा है। भारत की सहमति के बिना वहां किसी भी देश द्वारा परियोजना चलाना उसकी क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन है। आशंका है कि सीपीईसी के तहत बनने वाला ग्वादर बंदरगाह केवल व्यावसायिक नहीं, बल्कि भविष्य में चीनी नौसैनिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल हो सकता है। इससे हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की सुरक्षा को चुनौती मिल सकती है। अन्य वीडियो

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Feb 07, 2026, 05:07 IST
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