अध्ययन: पक्षियों में 8वां सुर...1.16 लाख आवाजों के डाटा से वैज्ञानिकों ने खोला यह राज; कितनों पर किया गया शोध?
कोयल की सुरीली आवाज हर किसी का मन मोह लेती है। दुनियाभर में पक्षियों की ऐसी हजारों प्रजातियां पाई जाती हैं जिनकी आवाज एकदम संगीतमय होती है। आखिर, इनके गीत कैसे बनते हैं हाल ही में एक नए अध्ययन में पता चला कि संगीत के सात सुरों की तरह पक्षियों के गाने मूलत: आठ प्रकार की ध्वनियों पर केंद्रित होते हैं। वैज्ञानिकों ने यह शोध दुनियाभर के विभिन्न हिस्सों की 3,000 से अधिक सॉन्गबर्ड यानी पैसिरीन प्रजाति के पक्षियों पर किया जो, कुल पक्षी प्रजातियों का 60% हिस्सा हैं। साइंस मैगजीन में प्रकाशित यह दिलचस्प अध्ययन ने पक्षियों की आवाज से जुड़े और राज भी खोलता है। जैसे कैसे समय के साथ इन सुरों में बदलाव आया। अध्ययन बताता है कि बुनियादी ध्वनियां करोड़ों वर्ष पहले शुरुआती पूर्वजों के समय ही विकसित हो गई थीं और 82% पैसिरीन पक्षियों के वंश के विकसित होने के साथ पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ती रहीं। शोध मुख्य रूप से फ्रांस के वैज्ञानिकों की एक टीम ने किया, जिसमें सेंट-एटिफ यूनिवर्सिटी और मोंटपेलियर यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता शामिल थे। हालांकि, इसके लिए किसी लैब या क्षेत्र में पक्षियों के गाने को रिकॉर्ड नहीं किया है। बल्कि कम्युनिटी साइंस डाटाबेस का इस्तेमाल कर दुनियाभर के 3,160 से अधिक प्रजातियों के पक्षियों के 1,16,000 से ज्यादा गानों का डिजिटल डाटा जुटाया गया व उसका विश्लेषण किया। तीन प्रकार की सीटियां व तीन प्रकार के ट्रिल्स खास आठ मूलभूत ध्वनियों में तीन प्रकार की सीटियां और तीन प्रकार के ट्रिल्स शामिल होते हैं। ट्रिल्स का मतलब है तेजी से दोहराई जाने वाली एक जैसी आवाजें, जैसे कीटों की गूंज होती है। पर्यावरण और परिवेश से तय होती है बोली स्थानीय परिवेश पक्षियों की बोली को सीधे तौर पर प्रभावित करता है। जो पक्षी घने और नमी वाले जंगलों में रहते हैं, वे आमतौर पर सरल और सपाट सीटी जैसी आवाज़ों का चुनाव करते हैं। ताकि उनकी आवाज घने पत्तों, पेड़ों और नमी के बीच बिना किसी रुकावट के दूर तक पहुंच सके। शीतोष्ण और खुले क्षेत्र में रहने वाले पक्षी अधिक जटिल और तीव्र आवाजें निकालते हैं, जो कम दूरी के संचार और अपने साथी को आकर्षित करने के लिए सबसे उपयुक्त होती हैं। शोध में पर्यावरण में आ रहे बदलाव का पक्षियों की बोलियों पर असर भी साफ देखा गया।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Aug 08, 2026, 03:42 IST
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