कंधार हाईजैक के बाद डर गया था लादेन: तालिबान ने दिया था सुरक्षा बढ़ाने का सुझाव, सीआईए रिकॉर्ड से खुलासा

सीआईए द्वारा सार्वजनिक किए गए दस्तावेजों से पता चलता है कि कंधार विमान अपहरण के बाद तालिबान ने ओसामा बिन लादेन को अपनी सुरक्षा बढ़ाने की चेतावनी दी थी। दस्तावेजों में 1998 से 2001 के बीच बिन लादेन की कथित हमले की योजनाओं, हथियार हासिल करने की कोशिशों, अमेरिका को निशाना बनाने की आशंकाओं और 11 सितंबर के आतंकवादी हमलों से पहले की खुफिया जानकारियों का भी उल्लेख है। कंधार बंधक संकट के बाद बढ़ाई गई थी सतर्कता तालिबान की ओर से बिन लादेन को दी गई इस चेतावनी का उल्लेख तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन को जनवरी 2000 में पेश की गई राष्ट्रपति की दैनिक खुफिया रिपोर्ट में किया गया था। यह उन 71 दस्तावेजों में शामिल है, जिन्हें 2001 के 11 सितंबर के आतंकवादी हमलों की 25वीं बरसी के अवसर पर सार्वजनिक किया गया है। 3 जनवरी 2000 की राष्ट्रपति की दैनिक खुफिया रिपोर्ट में कहा गया, 'तालिबान ने पिछले सप्ताह बिन लादेन को अपनी सुरक्षा बढ़ाने की चेतावनी दी थी, ताकि कंधार में बंधक संकट का इस्तेमाल या 'अन्य सरकारों' द्वारा बिन लादेन के खिलाफ भेजने के लिए न किया जा सके।" दस्तावेज में आगे कहा गया किबिन लादेन का एक प्रमुख समर्थक बना हुआ है। दस्तावेज के कुछ हिस्से गोपनीय होने के कारण उन्हें सार्वजनिक नहीं किया गया है। 24 दिसंबर 1999 को हुआ था भारतीय विमान का अपहरण इंडियन एयरलाइंस की उड़ान आईसी-814 को 24 दिसंबर 1999 को काठमांडू से नई दिल्ली आते समय अगवा कर लिया गया था। हरकत-उल-मुजाहिदीन के आतंकवादियों ने विमान को अपने कब्जे में लेने के बाद उसे कंधार ले जाने के लिए मजबूर किया था। कंधार में यह बंधक संकट 31 दिसंबर 1999 को उस समय समाप्त हुआ, जब भारत ने तीन आतंकवादियों को रिहा कर उन्हें तालिबान को सौंप दिया था। कई देशों में हमले की तैयारी का था अंदेशा 28 अगस्त 1998 को क्लिंटन को दी गई एक अन्य राष्ट्रपति की दैनिक खुफिया रिपोर्ट में कहा गया था कि बिन लादेन की मिस्र, अरब प्रायद्वीप विशेष रूप से कुवैत, सऊदी अरब और यमन के अलावा भारत, पाकिस्तान, युगांडा और संभवतः नाइजीरिया में हमले करने की योजना थी। दस्तावेज में कहा गया कि उत्तरी अमेरिका, यूरोप और पूर्वी एशिया में बिन लादेन का पहले से स्थापित नेटवर्क इस बात को विश्वसनीय बनाता है कि वह इन क्षेत्रों में अमेरिकी हितों को भी निशाना बना सकता है। 1998 में ही रासायनिक और जैविक हथियारों की आशंका 13 फरवरी 1998 का सबसे शुरुआती दस्तावेज बताता है कि बिन लादेन और अन्य इस्लामी चरमपंथियों ने से मुलाकात की और खुले बाजार से रासायनिक, जैविक तथा परमाणु पदार्थ हासिल करने पर सहमति जताई थी। दस्तावेज के कुछ हिस्से सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। रिपोर्ट में कहा गया था कि बिन लादेन के पास वैध कंपनियां, कारोबारी संबंध और एक बड़ा वित्तीय साम्राज्य था, जो उसे इन हथियारों को हासिल करने की कोशिश में मदद कर सकता था। अमेरिकी युद्धपोत पर हमले की जांच से जुड़े दस्तावेज भी जारी सीआईए द्वारा जारी कुछ राष्ट्रपति की दैनिक खुफिया रिपोर्ट तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश के लिए तैयार की गई थीं। इनमें अमेरिकी युद्धपोत यूएसएस कोल पर हुए हमले की अमेरिकी-यमन जांच के शुरुआती निष्कर्ष शामिल थे। 12 अक्टूबर 2000 को यमन के अदन बंदरगाह में अमेरिकी नौसेना के जहाज यूएसएस कोल पर हमला किया गया था। अमेरिकी शहर में विमान से हमले की चेतावनी 10 सितंबर 1998 की एक राष्ट्रपति की दैनिक खुफिया रिपोर्ट में चेतावनी दी गई थी कि चरमपंथी विस्फोटकों से भरे विमान को अमेरिकी शहर में गिरा सकते हैं। हालांकि, दस्तावेज में यह भी स्पष्ट किया गया था कि उपलब्ध खुफिया जानकारी बिन लादेन की भविष्य की हमले की योजनाओं के बारे में कोई निर्णायक जानकारी उपलब्ध नहीं कराती थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि बिन लादेन ने अमेरिका को उसकी अपनी जमीन पर निशाना बनाना अपनी पसंदीदा रणनीति बताया था और वॉशिंगटन में हमला करना उसका पसंदीदा विकल्प था। ये भी पढ़ें:कतार में जगह को लेकर फायरिंग: फिलीपींस में संसदीय चुनाव से पहले गोलीबारी; तीन की मौत, 15 घायल 11 सितंबर हमले के अगले दिन की रिपोर्ट में क्या कहा गया था सीआईए की ओर से जारी दस्तावेजों में अंतिम रिपोर्ट 12 सितंबर 2001 की है, यानी अमेरिका में 11 सितंबर के आतंकवादी हमलों के अगले दिन की। उन हमलों में विमान विश्व व्यापार केंद्र की इमारतों और पेंटागन से टकराए थे, जबकि एक अन्य विमान पेंसिल्वेनिया के एक खुले मैदान में गिर गया था। इस 'स्थिति रिपोर्ट' में हमलों से पहले बिन लादेन से जुड़ी खुफिया सूचनाओं और उसकी संभावित भूमिका का विवरण दिया गया था। रिपोर्ट में कहा गया था, 'बढ़ते सबूत संकेत देते हैं कि अफगानिस्तान और फारस की खाड़ी में मौजूद सुन्नी चरमपंथियों को हाल ही में इस बात की जानकारी थी कि ओसामा बिन लादेन के निर्देश पर हमले होने वाले हैं।' 12 सितंबर 2001 की राष्ट्रपति की दैनिक खुफिया रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि अफगानिस्तान में चरमपंथियों के बीच किसी संभावित अभियान के अस्तित्व की जानकारी व्यापक रूप से थी। यह भी अटकलें थीं कि तालिबान नेतृत्व के साथ अपनी गतिविधियों को लेकर संभावित टकराव से बचने के लिए बिन लादेन काबुल जा चुका हो सकता है। दस्तावेज के कई हिस्से अब भी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Sep 14, 2026, 14:04 IST
पूरी ख़बर पढ़ें »




कंधार हाईजैक के बाद डर गया था लादेन: तालिबान ने दिया था सुरक्षा बढ़ाने का सुझाव, सीआईए रिकॉर्ड से खुलासा #World #International #OsamaBinLaden #Taliban #KandaharPlaneHijacking #Ic-814 #CiaDocuments #September11Attacks #BillClinton #Al-qaeda #SubahSamachar