बिलासपुर: डीजे के शोर में गुम हो गए होली के पारंपरिक फाग गीत, समय के साथ बदला अंदाज

समय के साथ होली का अंदाज बदला है। हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में होली का स्वरूप पारंपरिक रंग छोड़ आधुनिकता की ओर बढ़ गया है। सबसे बड़ा बदलाव पारंपरिक फाग गीतों की जगह डीजे संस्कृति के बढ़ते प्रभाव के रूप में देखा जा रहा है। पहले महिलाओं की टोलियां होली के दिन इन गीतों को गाती थीं। पुरुष और बच्चे भी ढोल की थाप पर गांव-गांव घूमकर इस उत्सव को मनाते थे। अब यह संस्कृति लुप्त होती जा रही है। यह टोलियां न के बराबर ही दिखती हैं। पहले होली का मतलब ढोलक की थाप, मंजीरे की झंकार और फाग गीतों की मधुर स्वर लहरियां होती थी। आंगन में बैठकर गीत गाए जाते, बुजुर्गों का आशीर्वाद लिया जाता और फिर गुलाल लगाया जाता। गीतों में हास्य, व्यंग्य और लोक संस्कृति की झलक मिलती थी। होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता का प्रतीक हुआ करती थी। घरों में मालपुआ, जलेबी, पकौड़े और अन्य पारंपरिक व्यंजन बनाए जाते। अब यह सब गायब है।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Mar 02, 2026, 22:12 IST
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