Gorakhpur News: मैमोग्राफी से पता चलेगा हृदय रोग का खतरा, एम्स की नई पहल
- एम्स में महिलाओं को हृदय रोग से बचाव के लिए शुरू हुई पहल- मैमोग्राफी जांच में ही स्तन की धमनियों में जमा कैल्शियम का लगाएंगे पता- धमनियों में कैल्शियम जमा होने से हृदय रोग का खतरा सबसे अधिकगोरखपुर। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में महिलाओं को हृदय रोग से बचाने के लिए एक नई पहल की गई है। अब स्तन कैंसर की जांच के लिए की जाने वाली मैमोग्राफी से ही महिलाओं में हृदय रोग के खतरे का भी पता लगाया जा सकेगा। एम्स के डॉक्टर मैमोग्राफी जांच के दौरान स्तन की धमनियों में जमा कैल्शियम का पता लगाने की तैयारी कर रहे हैं। इससे समय रहते हार्ट अटैक, स्ट्रोक और हार्ट फेल्योर जैसी गंभीर बीमारियों के खतरे को पहचाना जा सकेगा। एम्स में स्तन कैंसर की स्क्रीनिंग की सुविधा पहले से ही उपलब्ध है। महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर के बाद स्तन कैंसर का खतरा सबसे अधिक माना जाता है। इसके लिए 35 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं को मैमोग्राफी जांच कराने की सलाह दी जाती है। अब इसी जांच को और प्रभावी बनाते हुए हृदय रोग के खतरे की पहचान करने की योजना बनाई जा रही है।एम्स की स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. आराधना सिंह ने बताया कि 35 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं को हर छह माह से एक वर्ष के भीतर मैमोग्राफी करानी चाहिए। इससे स्तन कैंसर का शुरुआती चरण में पता लगाया जा सकता है। मैमोग्राफी से स्तन की धमनियों में कैल्शियम जमा होने का पता लगाया जा सकता है। यदि धमनियों में कैल्शियम अधिक मात्रा में जमा होता है तो भविष्य में कार्डियोवैस्कुलर रोगों, जैसे हार्ट अटैक या स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में समय रहते इलाज और जीवनशैली में बदलाव कर इस खतरे को कम किया जा सकता है। कार्यकारी निदेशक डॉ. विभा दत्ता ने बताया कि एम्स प्रशासन इस नई सुविधा को शुरू करने के लिए तैयारी में जुटा है। इसके साथ ही कुछ अतिरिक्त मशीनें और तकनीकी संसाधन उपलब्ध कराकर मैमोग्राफी के साथ ब्रेस्ट आर्टेरियल कैल्सीफिकेशन की जांच भी शुरू की जाएगी।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Apr 25, 2026, 03:05 IST
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