UP: थाने में महिला से मारपीट के आरोप से पुलिस घिरी, मेडिकल रिपोर्ट में चोटों की पुष्टि; जानें पूरा मामला
आगरा के रुनकता निवासी सीमा सिकरवार को गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने कोर्ट में पेश किया था। मेडिकल में किसी चोट की पुष्टि नहीं की। आरोप लगाने के बाद मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट में चोटों की पुष्टि हो गई। इसमें चोट का समय भी दर्शाया गया। पुलिस पिटाई के आरोप में घिर गई है। पूरे मामले में मानवाधिकार आयोग से भी शिकायत की तैयारी पीड़ित पक्ष ने की है। सीमा सिकरवार के अधिवक्ता ने पुलिस हिरासत में मारपीट करने के मामले में अदालत में प्रार्थनापत्र दिया था। अदालत ने मेडिकल बोर्ड गठित कर मेडिकल कराने के आदेश दिए। मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट में सीमा के शरीर पर तीन चोटें दर्शायी गईं। इसमें एक चोट के लिए एक्सरे की भी सलाह दी गई। सभी चोटें साधारण प्रकृति, कठोर और कुंद वस्तु से पहुंचाया जाना दिखाया। साथ ही दो दिन पुरानी होने का उल्लेख भी किया। आरोपी महिला को 5 जून को कोर्ट में पेश किया गया जबकि गिरफ्तारी 4 जून को दिखाई गई। कोर्ट ने माना कि मेडिकल से उसे पुलिस हिरासत में गिरफ्तार करने वाले पुलिसकर्मियों ने चोटें पहुंचाईं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना कोर्ट ने अपने आदेश में लिखा है कि पुलिस हिरासत में आरोपी महिला को चोटें पहुंचाना सुप्रीम कोर्ट की विधि व्यवस्था डीके बसु बनाम पश्चिम बंगाल राज्य एआई आर 1997 एससी 610 व जोगेंद्र सिंह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एआईआर 1994 सुप्रीम कोर्ट 1349 में दिए गए दिशानिर्देश का घोर उल्लंघन है। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना भी है। इससे पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर विभागीय जांच-कार्रवाई करना उचित प्रतीत होता है। जीडी तलब करने के प्रार्थनापत्र पर सुनवाई आज महिला की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता के मुताबिक, पीड़िता एसएन मेडिकल कॉलेज में भर्ती रही थीं। उनका एक्सरे और सीटी स्कैन हुआ। डॉक्टरों ने पसली और कंधे में फ्रैक्चर बताया। उन्हें सांस लेने में भी दिक्कत हो रही है। ठीक से चल भी नहीं पा रही हैं। इस पर उन्होंने 4 जून का थाना परिसर में लगे सीसीटीवी फुटेज और जीडी तलब करने के लिए कोर्ट में प्रार्थनापत्र दिया है। इस पर मंगलवार को सुनवाई होगी। पहले भी सामने आ चुके हैं मामले थाना किरावली में किसान के साथ मारपीट की गई थी। उन्हें उल्टा कर पीटा गया था। इससे दोनों पैरों की हड्डी टूट गई थी। मामले में थानाध्यक्ष सहित तीन पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की गई थी। पीड़ित पक्ष कई दिन तक प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए अधिकारियों के चक्कर काटता रहा था। वहीं जीवनी मंडी चौकी में भी दूध विक्रेता की पिटाई की गई थी। इस मामले में भी चौकी प्रभारी को भी हटाया गया था। पीड़ित पक्ष बोला, दुकानों पर जबरन कब्जा करने की कर रहे थे कोशिश मामले में पीड़ित महिला की मां पुष्पा देवी ने मानवाधिकार आयोग में शिकायत की है। इसमें कहा है कि वर्ष 2018 के मामले में मात्र एक वारंट पर पुलिस ने उनकी बेटी सीमा को गिरफ्तार किया। घर में तोड़फोड़ की। थाने में बेटी को पीटा गया। थानाध्यक्ष पर भी पीटने के आरोप लगाए। परिवार के किसी सदस्य से मिलने नहीं दिया। पुष्पा देवी ने लिखा है कि उन्होंने किरावली मोड़ पर स्थित अपनी सात दुकान और एक गोदाम को बाह निवासी ज्ञानेंद्र भदाैरिया को 11 माह के लिए किराए पर दिया था। इसका किरायानामा भी बनवाया, 6 बार इसे बढ़ाया गया। 1 मार्च 2025 को ज्ञानेंद्र ने अपने रिश्तेदार अंकुश के नाम पर संपत्ति को कृषि भूमि दर्शाते हुए फर्जी बैनामा कराया। दुकानों पर जबरन कब्जा करने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने 24 जुलाई 2025 को विधिक नोटिस दिया। किरायानामा को निरस्त कर दुकान और हाल को खाली करा लिया। इस मामले में बेटी मधु कुमारी ने थाना सिकंदरा में प्राथमिकी दर्ज करा दी। मगर कोई कार्रवाई नहीं हुई। विवेचना चल रही है। 2 जून को एक प्राथमिकी दर्ज हुई। इस पर पुलिसकर्मी जांच करने के नाम पर 3 जून को आ गए। उनके साथ ज्ञानेंद्र के भाई जयचंद भी थे। दुकानों को जबरन खुलवाने का प्रयास किया जबकि संपत्ति पर कोर्ट की ओर से स्थगनादेश दिया गया है। इस पर विरोध किया। भीड़ के आने पर पुलिस चली गई। अगले दिन गिरफ्तारी कर ली गई। पीड़िता ने थाना सिकंदरा पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Jun 09, 2026, 04:59 IST
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