Dehradun News: अधिवक्ता की भूल के लिए पक्षकार को न्याय से नहीं कर सकते वंचित

अधिवक्ता की लापरवाही या चूक का खमियाजा किसी पक्षकार को नहीं भुगतना चाहिए। यह महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए जिला न्यायाधीश हरीश कुमार गोयल ने एक मोटर दुर्घटना दावा (एमएसीटी) मामले में बीमा कंपनी को लिखित बयान दाखिल करने का अंतिम अवसर प्रदान किया है। अदालत ने कहा कि स्थापित विधिक सिद्धांत है कि अधिवक्ता की भूल के कारण किसी पक्षकार को न्याय से वंचित नहीं किया जा सकता।मामला वर्ष 2023 में दायर मोटर दुर्घटना प्रतिकर याचिका से जुड़ा है। बीमा कंपनी की ओर से समय पर लिखित बयान दाखिल नहीं होने पर पांच मई 2025 को अदालत ने उसका अवसर समाप्त कर दिया था। इसके बाद बीमा कंपनी ने आदेश निरस्त करने के लिए आवेदन देते हुए कहा कि उनके अधिवक्ता ने मुकदमे की प्रगति की जानकारी नहीं दी, जिसके कारण वे समय पर अदालत में उपस्थित नहीं हो सके और उन्हें आदेश की जानकारी भी काफी बाद में मिली।याचिकाकर्ता ने इस आवेदन का विरोध किया, लेकिन जिला न्यायाधीश ने माना कि यदि देरी की भरपाई लागत (कॉस्ट) लगाकर की जा सकती है तो केवल अधिवक्ता की गलती के कारण पक्षकार को अपना पक्ष रखने के अवसर से वंचित करना न्यायोचित नहीं होगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि न्याय का उद्देश्य विवाद का गुण-दोष के आधार पर निस्तारण करना है, न कि तकनीकी आधार पर किसी पक्ष को बाहर कर देना। अदालत ने बीमा कंपनी का आवेदन स्वीकार करते हुए एक हजार रुपये की लागत जमा कराने की शर्त पर लिखित बयान दाखिल करने की अनुमति दे दी। साथ ही निर्देश दिया कि प्रतिवादी आगे मुकदमे के निस्तारण में अनावश्यक विलंब नहीं करेंगे। मामले की अगली सुनवाई के लिए एक अगस्त 2026 की तिथि नियत की गई है।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jul 06, 2026, 02:35 IST
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