अमेरिका समेत कई देशों में प्रतिबंध के बावजूद चीन के घरेलू बाजार ने संभाल लिया हुवावे को

चीन की मशहूर कंपनी हुवावे टेक्नोलॉजी को चीन के घरेलू बाजार ने संभाल लिया है। 2020 में ये कंपनी अमेरिका और उसके सहयोगी के निशाने पर बनी रही। कई देशों में कंपनी पर प्रतिबंध लगाया गया। उसे पहले से मिले सौदों को रद्द कर दिया गया। इसके बावजूद बीते साल इस कंपनी की बिक्री और मुनाफे में बढ़ोतरी हुई। कंपनी ने अपने बीते साल के आंकड़े बुधवार को जारी किए। पिछले साल हुवावे को विदेश में अपने बाजार का एक बड़ा हिस्सा गंवाना पड़ा। खासकर स्मार्टफोन के क्षेत्र में उसे नुकसान हुआ। अमेरिका ने अमेरिकी टेक्नोलॉजी की इस कंपनी को सप्लाई पर रोक लगा दी। इसका असर हुआ। साथ ही कोरोना महामारी ने भी कंपनी के कारोबार को प्रभावित किया। कंपनी के सह-अध्यक्ष केन हू ने एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा- हमारी राय में अमेरिकी कार्रवाई से हुवावे के लिए एक बहुत अन्यायपूर्ण स्थिति पैदा हुई है। इससे हमें भारी नुकसान हुआ है। हम दुनिया में सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन के मामले में पुनर्विचार की अपील करते हैं, ताकि हम आगे बढ़ सकें। गौरतलब है कि अमेरिका ने हुवावे को महत्वपूर्ण उपकरणों और टेक्नोलॉजी की सप्लाई पर रोक लगा दी है। अमेरिका का आरोप है कि हुवावे का संबंध चीन की सेना से है और इस कंपनी मिले यूजर्स के डेटा चीन सरकार तक पहुंच जाते हैँ। हुवावे बार-बार इस आरोप का खंडन करती रही है। हुवावे 5जी तकनीक में दुनिया की अग्रणी कंपनी है। लेकिन अमेरिका ने न सिर्फ अपने देश में इस पर रोक लगाई है, बल्कि अपने सहयोगी देशों पर भी उसने इस कंपनी से नाता तोड़ लेने के लिए दबाव डाला है। इसके बावजूद पिछले साल हुवावे की आमदनी में 3.8 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। उसके मुनाफे में 3.2 फीसदी का इजाफा हुआ। इसमें से 66 फीसदी आमदनी चीन के अंदर से हुई। 2019 में हुवावे की आमदनी का सिर्फ 59 फीसदी हिस्सा चीन के अंदरूनी बाजार से आया था। इसका मतलब है कि अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण अब ये कंपनी चीन के घरेलू बाजार पर ज्यादा निर्भर हो गई है। पिछले साल हुवावे की अमेरिका से हुई आमदनी में 24.5 फीसदी, यूरोप से आमदनी में 12.2 फीसदी और एशिया-प्रशांत क्षेत्र से प्राप्त राजस्व में 8.7 फीसदी की कमी आई। हुवावे को असल में चीन में बुनियादी ढांचा मजबूत करने की लागू की जा रही विशाल योजना ने संभाल लिया है। इस नई इन्फ्रास्ट्रक्चर पहल को पिछले साल चीन सरकार ने लॉन्च किया। इसके तहत देश भर में 5जी केंद्र बनाए जा रहे हैं। ये पहल कोरोना महामारी से लगे झटके से अर्थव्यवस्था को संभालने की चीन की कोशिश का हिस्सा है।. गौरतलब यह है कि टेलीकॉम उपकरण सेक्टर में चीन में हुवावे की ताकत जिस तरह बढ़ी, उससे इस क्षेत्र के वैश्विक कारोबार में उसका हिस्सा बढ़ कर 33 फीसदी हो गया है। 2019 में ये हिस्सा 31 फीसदी था। लाइटकाउंटिंग मार्केस रिसर्च नाम की एजेंसी के चीफ एनालिस्ट स्टीफेन टेराल ने वेबसाइट निक्कई एशिया से कहा कि हुवावे को हुआ फायदा नोकिया के नुकसान की कीमत पर मिला है। नोकिया कंपनी ने चीन में शुरू की गई 5जी परियोजना में हिस्सा नहीं लिया। उन्होंने कहा- हुवावे और जेडटीई (एक अन्य चीनी टेलीकॉम कंपनी) के खिलाफ अमेरिका के नेतृत्व में चलाए गए अभियान के बावजूद 2020 में वायरलेस इन्फ्रास्ट्रक्चर मार्केट की दिशा में शायद ही कुछ बदला। लेकिन विश्लेशकों का अनुमान है कि 2021 में हुवावे का अंतरराष्ट्रीय बाजार सिकुड़ेगा। पिछले साल यूरोप में लगभग 40 टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स ने 5जी शुरू करने के लिए हुवावे का चयन नहीं किया। कनाडा में हुवावे की जगह ये ठेका सैमसंग को मिला है। न्यूजीलैंड में भी सैमसंग को चुना गया। भारत ने भी हुवावे को अपने बाजार में ना आने देने का फैसला किया है। ऐसे में हुवावे की इस साल चीन के घरेलू बाजार पर निर्भरता और बढ़ेगी। वैसे जानकारों के मुताबिक चीन का घरेलू बाजार इतना बड़ा है कि तमाम प्रतिबंधों के बावजूद ये कंपनी लखड़खड़ागी, इसकी संभावना कम है।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Apr 01, 2021, 15:27 IST
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