Tips: फोन-लैपटॉप स्क्रीन देखते ही होने लगती है आंखों में जलन? आज ही ऑन करें ये 2 सीक्रेट सेटिंग्स, मिलेगा आराम

Digital Eye Strain Prevention: आज के समय में ऑफिस का काम हो, ऑनलाइन पढ़ाई या फिर सोशल मीडिया, लोग घंटों मोबाइल और लैपटॉप स्क्रीन के सामने बिताते हैं। लगातार स्क्रीन देखने की वजह से आंखों में दर्द, जलन, भारीपन, सिरदर्द और धुंधला दिखने जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। इसे डिजिटल आई स्ट्रेन या कंप्यूटर विजन सिंड्रोम कहते हैं। लंबे समय तक स्क्रीन का ज्यादा इस्तेमाल आंखों पर धीरे-धीरे असर डालता है। हालांकि अच्छी बात यह है कि फोन और लैपटॉप की कुछ आसान सेटिंग्स ऑन करके आंखों पर पड़ने वाले दबाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है। Blue Light Filter Laptop: ब्लू लाइट फिल्टर, आंखों की रेटिना को करती हैं प्रभावित हमारे स्मार्टफोन और लैपटॉप की स्क्रीन से लगातार ब्लू लाइट यानी की नीली रोशनी निकलती रहती है, जो हमारी आंखों के रेटिना पर सीधा और सबसे ज्यादा हानिकारक प्रभाव डालती है। इससे बचने के लिए अपने डिवाइस का इन बिल्ट ब्लू लाइट फिल्टर हमेशा ऑन रखें। यह स्क्रीन को थोड़ा वॉर्म मतलब की हल्का पीला कर देता है, जिससे आंखों को सुकून मिलता है। सभी फोन में इसके अलग-अलग नाम होते हैं सैमसंग (Samsung): अगर आप सैमसंग यूजर हैं, तो अपने फोन की सेटिंग्स में जाकर Eye Comfort Shield को इनेबल करें। पिक्सेल (Google Pixel): अगर आप गूगल पिक्सेल का इस्तेमाल करते हैं, तो डिस्प्ले सेटिंग्स में उपलब्ध Night Light फीचर को ऑन करें। आईफोन (iPhone): आईफोन वाले कंट्रोल सेंटर या डिस्प्ले सेटिंग्स में जाकर Night Shift मोड को एक्टिवेट करें। लैपटॉप यूजर्स: अगर आपका अधिकतर काम लैपटॉप से होता है, तो विंडोज या मैकबुक दोनों की ही डिस्प्ले सेटिंग्स (Display Settings) में यह फीचर मौजूद होता है, इसे शेड्यूल भी किया जा सकता है। Enable Dark Mode Phone: डार्क मोड, आंखों पर रोशनी के दबाव को करें आधा अगर आप अभी भी अपने फोन या लैपटॉप पर क्लासिक 'लाइट मोड' (सफेद बैकग्राउंड) का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो इससे आपकी आंखें प्रभावित हो सकती हैं। इसलिए आज हीत अपने डिवाइस की सेटिंग्स में जाएं और डार्क मोड (Dark Mode) को ऑन कर लें। इसे इनेबल करते ही आपके एप्स और स्क्रीन का बैकग्राउंड पूरी तरह काला (ब्लैक) हो जाता है। बैकग्राउंड डार्क होने से स्क्रीन से निकलने वाली कुल रोशनी का दबाव आंखों पर बहुत कम पड़ता है, जिससे आप बिना किसी तनाव या दर्द के लंबे समय तक काम कर पाते हैं। यह सेटिंग आपके फोन की बैटरी बचाने में भी मददगार होती है। इसके अलावा कई लोगों की आदत होती है कि वे घर के अंदर या अंधेरे कमरे में भी अपने फोन की ब्राइटनेस (चमक) को फुल रखते हैं। स्क्रीन का बहुत ज्यादा चमकदार होना डिजिटल आई स्ट्रेन की सबसे बड़ी वजह है। इससे बचने का सबसे सरल उपाय है कि अपने डिवाइस में ऑटो-ब्राइटनेस फीचर को हमेशा ऑन रखें। यह फीचर आपके आसपास मौजूद रोशनी (एम्बिएंट लाइट) को भांपकर स्क्रीन की चमक को अपने आप बिल्कुल सटीक लेवल पर सेट कर देता है। चाहे आप तेज धूप में हों या अंधेरे कमरे में, आपकी स्क्रीन कभी भी जरूरत से ज्यादा ब्राइट नहीं होगी, जिससे आंखों को होने वाला नुकसान रुक सकता है। How to use Eye Comfort Shield: आंखों को बचाने के लिए ये आदतें भी जरूरी सिर्फ सेटिंग्स बदलना ही काफी नहीं है। कुछ छोटी आदतें भी आंखों को राहत दे सकती हैं: हर 20 मिनट बाद 20 सेकंड का ब्रेक लें। स्क्रीन से उचित दूरी बनाए रखें। अंधेरे कमरे में तेज स्क्रीन इस्तेमाल न करें। आंखों को बार-बार झपकाते रहें। जरूरत पड़ने पर एंटी-ग्लेयर ग्लासेस का इस्तेमाल करें।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: May 21, 2026, 00:07 IST
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