Save Yamuna: अप्रैल की बरसात भी कम न कर सकी प्रदूषण, दिल्ली में और मैली हुई यमुना; मल-मूत्र से फैली गंदगी
तमाम दावों के बावजूद दिल्ली में यमुना स्वच्छ होने के बजाय और मैली हुई है। अप्रैल में रिकॉर्ड बारिश के बावजूद प्रदूषण कम नहीं हुआ। यह खुलासा दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति की ताजा रिपोर्ट में हुआ है। 7 अप्रैल को लिए गए नमूनों में अधिकांश हिस्सों में पानी अत्यंत प्रदूषित पाया गया है। कई स्थानों पर जलीय जीवन के लिए स्थिति अनुकूल तक नहीं पाई गई है। हाल के वर्षों में दिल्ली में अप्रैल का महीना सबसे अधिक बारिश वाला रहा है, लेकिन इस ज्यादा बारिश से यमुना को साफ करने में ज्यादा मदद नहीं मिली है। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) की ताजा रिपोर्ट से पता चलता है कि यमुना और मैली हुई है। 7 अप्रैल को लिए गए जल नमूनों के आधार पर जारी रिपोर्ट में नदी के अधिकांश हिस्सों में पानी अत्यंत प्रदूषित पाया गया है। कई स्थानों पर जलीय जीवन के लिए स्थिति अनुकूल तक नहीं पायी गई है। प्रत्येक माह यमुना की जल गुणवत्ता की रिपोर्ट डीपीसीसी जारी करता है। इसके लिए पल्ला, वजीराबाद, आईएसबीटी ब्रिज, आईटीओ ब्रिज, निजामुद्दीन ब्रिज, हिंडन कट, ओखला बैराज और असगरपुर आठ स्थानों से नदी के जल के नमूने लेकर जांच की जाती है। बीओडी, घुलित आक्सीजन (डीओ), रासायनिक आक्सीजन मांग (सीओडी), पीएच और फीकल कोलीफॉर्म जैसे मानकों की जांच कर प्रदूषण स्तर का आकलन किया जाता है। अप्रैल की रिपोर्ट में इनमें से पांच स्थानों पर फीकल कोलीफॉर्म के स्तर में मामूली सुधार दर्ज किया गया लेकिन सभी स्थानों पर यह स्तर निर्धारित सीमा से अधिक है। पानी में फीकल कोलीफार्म का स्तर प्रति 100 मिलीलीटर अधिकतम 500 सर्वाधिक संभावित संख्या (एमपीएन) होना चाहिए। इसका स्तर 2,500 एमपीएन से अधिक होने पर पानी उपयोग योग्य नहीं रह जाता। रिपोर्ट के अनुसार, पल्ला और वजीराबाद क्षेत्रों को छोड़कर यमुना के लगभग सभी प्रमुख स्थानों पर घुलित ऑक्सीजन (डीओ) का स्तर शून्य पाया गया है। इसका मतलब है कि इन इलाकों में मछलियों और अन्य जलीय जीवों के जीवित रहने की संभावना नहीं है। वहीं, जैविक ऑक्सीजन मांग (बीओडी) और रासायनिक ऑक्सीजन मांग (सीओडी) भी मानकों से कई गुना अधिक दर्ज की गई है, जो अत्यधिक प्रदूषण की पुष्टि करता है। असगरपुर क्षेत्र में प्रदूषण का स्तर सबसे अधिक आईटीओ ब्रिज, आईएसबीटी ब्रिज, निजामुद्दीन ब्रिज, ओखला बैराज और अन्य डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों में फीकल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया की मात्रा बेहद अधिक पाई गई, जो सीधे तौर पर सीवेज के बिना उपचारित पानी के नदी में मिलने को दर्शाता है। कुछ स्थानों पर यह स्तर लाखों एमपीएन प्रति 100 मिलीलीटर तक पहुंच गया, जो गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा करता है। रिपोर्ट में सामने आया है कि दिल्ली के कई सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) अपनी निर्धारित क्षमता के अनुसार काम नहीं कर रहे हैं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि कई स्थानों पर फॉस्फेट और अमोनियाकल नाइट्रोजन की मात्रा भी खतरनाक स्तर पर पहुंच चुकी है। यमुना सफाई के लिए बढ़े सैकड़ों हाथ राजधानी के सिग्नेचर ब्रिज के पास यमुना नदी की सफाई के लिए रविवार को स्वस्ति दास सेवा संस्थान ने विशेष अभियान चलाया। इसमें यमुना संसद व एक्ट फॉर इंडिया से जुड़े युवाओं ने भी हिस्सा लिया। देखते ही देखते कई कॉलेजों के छात्र-छात्राओं और विभिन्न एनजीओ के सदस्यों सहित सैकड़ों लोगों ने नदी किनारे जमा कचरे और गंदगी को साफ किया। संस्थान के संस्थापक विनय दास ने कहा कि यमुना को स्वच्छ और निर्मल बनाना सभी की जिम्मेदारी है। कोई भी सरकार पर्यावरण या नदी की स्वच्छता को लेकर तब तक सफल नहीं हो सकती, जब तक वहां की आम जनता उस स्वच्छता में अपनी भागीदारी न दे। पर्यावरण प्रेमियों ने कहाकि दिल्ली में सिविक सेंस की जितनी कमी है, वह आपको और कही नहीं दिखेगी। खुशी है कि युवाओं का एक तबका आज आवाज उठा रहा है। कार्यक्रम में शामिल छात्रों ने भी कहा कि इस तरह के अभियान पर्यावरण संरक्षण के लिए बेहद जरूरी हैं।
- Source: www.amarujala.com
- Published: May 18, 2026, 03:42 IST
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