कौन थे मुकुल रॉय?: टीएमसी के संस्थापक से ममता के रणनीतिकार तक, बंगाल की राजनीति के चाणक्य ने ली अंतिम सांस
पश्चिम बंगाल की राजनीति के वरिष्ठ नेता और पूर्व रेल मंत्री मुकुल रॉय का सोमवार तड़के दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। वह 71 वर्ष के थे। परिवार के अनुसार, उन्होंने सोमवार सुबह करीब 1:30 बजे एक निजी अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके बेटे शुभ्रांशु रॉय ने बताया कि वह पिछले कई दिनों से कोमा में थे। मुकुल रॉय तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के संस्थापक सदस्यों में शामिल थे और 1998 में ममता बनर्जी के साथ पार्टी की स्थापना में उनकी अहम भूमिका रही थी। लंबे राजनीतिक करियर के दौरान उन्होंने राष्ट्रीय और राज्य की राजनीति में प्रभावशाली भूमिका निभाई। वर्ष 2011 में यूपीए-2 सरकार के दौरान, जब टीएमसी केंद्र में सहयोगी दल थी, तब उन्हें रेल मंत्री बनाया गया था। इससे पहले वह जहाजरानी राज्य मंत्री भी रह चुके थे और पश्चिम बंगाल से दो बार राज्यसभा सदस्य चुने गए। टीएमसी से मतभेद के बाद उन्होंने 2017 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दामन थाम लिया और बंगाल में पार्टी के संगठन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्हें राज्य की राजनीति का रणनीतिकार माना जाता था और 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के 42 में से 18 सीटें जीतने की रणनीति में उनकी भूमिका अहम बताई जाती है। 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में उन्होंने भाजपा के टिकट पर कृष्णानगर उत्तर सीट से जीत हासिल की थी। हालांकि, चुनाव के बाद उनका भाजपा में प्रभाव धीरे-धीरे कम होता गया और उन्होंने जून 2021 में दोबारा टीएमसी में वापसी कर ली। इसके बाद उनकी सक्रिय राजनीतिक भूमिका सीमित हो गई, खासकर स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के चलते। राजनीतिक सूझबूझ के कारण उन्हें “बंगाल की राजनीति का चाणक्य” भी कहा जाता था। 2011 में वाम मोर्चा को सत्ता से हटाकर टीएमसी को बंगाल की सत्ता तक पहुंचाने में भी उनकी रणनीतिक भूमिका रही थी। हालांकि, उनके राजनीतिक सफर में विवाद भी जुड़े रहे। शारदा चिटफंड घोटाले और नारदा स्टिंग मामले में नाम सामने आने के बाद 2015 में उन्हें टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव पद से हटा दिया गया था। पिछले कुछ वर्षों में उनकी सेहत लगातार गिरती रही। 2023 में डिमेंशिया से जूझने की बात सार्वजनिक हुई थी, जब दिल्ली यात्रा के दौरान उन्होंने खुद को भाजपा विधायक बताया था। वर्ष 2025 में कलकत्ता हाईकोर्ट ने दल-बदल कानून का उल्लंघन मानते हुए उन्हें विधायक पद के लिए अयोग्य ठहरा दिया था। उनके निधन से पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक युग का अंत माना जा रहा है, क्योंकि वह राज्य की बदलती राजनीतिक धाराओं के प्रमुख रणनीतिक चेहरों में से एक थे।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Feb 23, 2026, 07:13 IST
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