Ebola Virus: कांगो में इबोला संकट बरकरार, बेहतर जांच के बावजूद नियंत्रण से दूर हालात; WHO ने जताई चिंता

अफ्रीकी देश कांगो में फैले इबोला वायरस के प्रकोप को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने गंभीर चिंता जताई है। संगठन के महानिदेशक टेड्रोस एडहानोम घेब्रेयेसस ने कहा कि जांच और प्रयोगशाला सुविधाओं में सुधार हुआ है, लेकिन संक्रमण को रोकने की लड़ाई में स्वास्थ्य एजेंसियां अभी भी पीछे चल रही हैं। उन्होंने कहा कि इबोला का प्रकोप हमसे काफी आगे निकल चुका था और हम अभी भी उससे पीछे हैं। हालांकि अब हालात को पकड़ने की कोशिश की जा रही है। हिंसा और आतंकी हमले राहत कार्यों में बड़ी चुनौती कांगो के पूर्वी हिस्से में हालात और अधिक जटिल हो गए हैं। मंगलवार रात नॉर्थ किवू प्रांत के बेनी क्षेत्र में इस्लामिक स्टेट (IS) से जुड़े आतंकी संगठन एलाइड डेमोक्रेटिक फोर्सेज (ADF) के हमले में 16 लोगों की मौत हो गई। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार यह हमला कांगो और युगांडा की संयुक्त सैन्य कार्रवाई के जवाब में किया गया। इससे पहले भी उग्रवादियों ने सीमा के पास कई गांवों पर हमला कर दर्जनों लोगों की जान ली थी। लगातार जारी हिंसा और असुरक्षा के कारण स्वास्थ्यकर्मियों को प्रभावित इलाकों तक पहुंचने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। 60 मौतें, 344 मामले; संक्रमण का दायरा चिंता बढ़ा रहा मई के मध्य में घोषित इस प्रकोप के बाद अब तक कांगो में इबोला के 344 मामलों की पहचान की गई है, जिनमें 60 लोगों की मौत हो चुकी है। पड़ोसी देश युगांडा में भी संक्रमण पहुंच चुका है, जहां 15 मामलों की पुष्टि हुई है और एक व्यक्ति की जान गई है। हालांकि संदिग्ध मामलों की संख्या में कुछ कमी दर्ज की गई है, फिर भी विशेषज्ञों का मानना है कि वास्तविक स्थिति आंकड़ों से कहीं अधिक गंभीर हो सकती है। WHO प्रमुख ने दी उम्मीद की किरण डब्ल्यूएचओ प्रमुख टेड्रोस हाल ही में कांगो के सबसे प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करके लौटे हैं। उन्होंने कहा कि प्रयोगशाला क्षमता बढ़ाई गई है और संक्रमण की पहचान पहले की तुलना में तेज हो रही है। उन्होंने कहा कि जो मैंने वहां देखा, उससे उम्मीद जरूर जगी है, लेकिन चुनौतियां अभी भी बड़ी हैं। टेड्रोस ने उन देशों से भी यात्रा प्रतिबंध हटाने की अपील की है जिन्होंने इबोला के डर से कांगो से आने-जाने पर पाबंदियां लगाई हैं। उनका कहना है कि इससे मेडिकल सप्लाई और राहत कार्य प्रभावित हो रहे हैं। संपर्क ट्रेसिंग में बड़ी कमी विशेषज्ञों का मानना है कि इबोला को रोकने के लिए संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए लोगों की पहचान और निगरानी बेहद जरूरी होती है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार अभी तक केवल 45 प्रतिशत संपर्कों की निगरानी हो पा रही है, जबकि संक्रमण पर नियंत्रण के लिए यह आंकड़ा 90 प्रतिशत से ऊपर होना चाहिए। असुरक्षा, विस्थापन और लगातार एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने वाली आबादी के कारण यह कार्य बेहद कठिन साबित हो रहा है। वैक्सीन और दवा की कमी बढ़ा रही चिंता इस बार फैला इबोला वायरस 'बुंडिबुग्यो' प्रकार का है, जिसके लिए फिलहाल कोई स्वीकृत वैक्सीन या प्रभावी दवा उपलब्ध नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि संभावित वैक्सीन विकसित कर प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचाने में कई महीने लग सकते हैं। हालांकि अब तक कम से कम पांच मरीजों के स्वस्थ होने की खबरें भी सामने आई हैं, जिससे उम्मीद बनी हुई है। स्वास्थ्य अधिकारियों के सामने एक और बड़ी चुनौती स्थानीय लोगों के बीच फैली गलत धारणाएं हैं। कई लोग अब भी इबोला वायरस के अस्तित्व पर विश्वास नहीं कर रहे हैं, जिसके कारण संक्रमित व्यक्ति समय पर इलाज नहीं करा रहे। कुछ इलाकों में लोगों ने स्वास्थ्य केंद्रों पर हमला भी किया और अपने परिजनों के शव वापस मांगने की कोशिश की, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा और बढ़ गया।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jun 04, 2026, 02:52 IST
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