TADA दोषी की रिहाई पर बवाल: बोबाजार धमाके के आरोपी को रिहा करने के आदेश के खिलाफ SC पहुंची सुवेंदु सरकार

पश्चिम बंगाल सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट के उस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है, जिसमें मोहम्मद राशिद खान को समय से पहले रिहा करने का निर्देश दिया गया था। खान को कोलकाता में 1993 में हुए बोबाजार बम धमाकों में दोषी ठहराया गया था, जिनमें 69 लोगों की मौत हो गई थी। राज्य सरकार के वकील द्वारा मामले को तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का अनुरोध करने के बाद जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने कहा कि वह इस अनुरोध पर विचार करेगी। गंभीर अपराध का हवाला देकर जल्द सुनवाई की मांग वकील ने कहा कि यह मामला 'बहुत गंभीर अपराध' से जुड़ा है और पीठ से आग्रह किया कि मामले को 22 जून को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए। उन्होंने बताया कि राज्य के सेंटेंस रिव्यू बोर्ड (SSRB) ने खान की रिहाई के खिलाफ सिफारिश की थी। खान को टेररिस्ट एंड डिसरप्टिव एक्टिविटीज (प्रिवेंशन) एक्ट (TADA) के तहत दोषी ठहराया गया था, लेकिन हाई कोर्ट ने उसकी रिहाई का आदेश दे दिया। 33 साल जेल में रहने के बाद मिली थी राहत 5 जून को दिल्ली हाई कोर्ट ने खान की याचिका को मंजूरी दे दी थी। खान 33 साल से अधिक समय जेल में बिता चुका था। अदालत ने उसकी लंबी जेल अवधि, जेल में उसके व्यवहार और समय से पहले रिहाई के पीछे की सुधारात्मक सोच को ध्यान में रखते हुए यह फैसला सुनाया। बोबाजार धमाके में दोषी ठहराया गया था खान 31 अगस्त 2001 को खान को भारतीय दंड संहिता (IPC), विस्फोटक अधिनियम और TADA के तहत दोषी ठहराया गया था। उसे 16 मार्च 1993 को कोलकाता के भीड़भाड़ वाले इलाके में हुए बोबाजार बम धमाकों में शामिल होने का दोषी पाया गया था, जिनमें 69 लोगों की मौत हो गई थी। उम्र और स्वास्थ्य का हवाला देकर मांगी थी रिहाई खान ने इस आधार पर सजा में छूट की मांग की थी कि उसने 33 साल से अधिक समय न्यायिक हिरासत में बिताया है। उसने बताया कि वह 77 वर्ष का है और उम्र संबंधी कई बीमारियों से पीड़ित है। उसने यह भी तर्क दिया कि उसके साथ दोषी ठहराए गए पन्नालाल जयसूरा को 5 मार्च 2014 को समय से पहले रिहा कर दिया गया था। SSRB की सिफारिश और फिर यू-टर्न हालांकि SSRB ने 25 मार्च 2015 को उसकी समय से पहले रिहाई की सिफारिश की थी, लेकिन बाद में सितंबर 2015 में उस सिफारिश की समीक्षा की गई और उसे खारिज कर दिया गया। हाई कोर्ट ने सुधारात्मक न्याय को बताया अहम हाई कोर्ट ने उसकी रिहाई का आदेश देते हुए कहा कि सजा का मुख्य उद्देश्य सुधार होना चाहिए और जेल में रहने के दौरान दोषी कैदी को एक बेहतर इंसान बनाने की हर संभव कोशिश की जानी चाहिए। ये भी पढ़ें: कूचबिहार में टीएमसी नेता उदयन गुहा पर अंडों से हमला, अभिषेक से लेकर कुणाल घोष तक बन चुके निशाना वो धमाका जिसने दहला दिया था कोलकाता 16 मार्च 1993 की रात को कोलकाता में हुए बोबाजार बम धमाके में 69 लोगों की जान चली गई थी और कई रिहायशी इमारतें मलबे में तब्दील हो गई थीं। यह धमाका कथित तौर पर स्थानीय डॉन राशिद खान द्वारा जमा किए गए भारी मात्रा में विस्फोटकों के कारण हुआ था। यह घटना मुंबई सीरियल बम धमाकों के कुछ ही दिनों बाद हुई थी और उस समय देश की सबसे चर्चित आतंकी घटनाओं में शामिल रही।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jun 18, 2026, 15:03 IST
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