पश्चिम एशिया संकट: हिंद महासागर में अमेरिका ने डुबोया ईरानी युद्धपोत, बढ़ता टकराव भारत के लिए चिंताजनक कैसे?

दुनिया की राजनीति अब अत्यधिक खतरनाक मोड़ पर पहुंच गई है। इसका कारण है कि अमेरिका और इस्राइल का ईरान पर किए गए हमले और फिर ईरान की ओर से जवाबी कार्रवाई ने खाड़ी देशों के साथ-साथ दुनियाभर की राजनीति में चिंता पैदाकर दी है। इस आधार पर यहकहना गलत नहीं होगा किइस युद्ध की आग से उठे लपेटेंने सिर्फ पश्चिम एशिया ही नहीं, बल्कि दक्षिण एशिया और अब भारतीय महासागर के पानी में भी उबाल आ गया है।तनाव इतना बढ़ चुका है कि एक अंतरराष्ट्रीय शक्ति ने टॉरपीडो तक चलाकर अपनी ताकत दिखा दी, जिससे भारत में चर्चा तेज हो गई है। आइए जानते हैं कि पश्चिम एशिया का युद्ध अब भारत के दरवाजे तक पहुंच गया पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अमेरिकी पनडुब्बी ने बुधवार को अंतरराष्ट्रीय जल में ईरानी युद्धपोत आईआरआईएस देना को टॉरपीडो से निशाना बनाया और ध्वस्त कर दिया।इस हमले से जहाज का मुख्य ढांचा टूट गया, जिससे बचाव दल को कोई जहाज नहीं मिला। गौर करने वाली बात यह है कि यह अमेरिका की द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली टॉरपीडो से युद्धपोत पर किया गया हमला है। भारत से कैसे हैसंबंधपहले ये समझिए इस बात को ऐसे समझिए कि जब ईरान के युद्धपोत पर अमेरिका का यह हमला हुआ, उस समयआईआरआईएस देनाभारत में आंध्र प्रदेश केविशाखपटनमकेविजाग से लौट रही थी, जहां उसने मिलान अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास और बंगाल की खाड़ी में अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक रिव्यू में हिस्सा लिया था। हमला श्रीलंका के दक्षिणी तट के पास अंतरराष्ट्रीय जल में हुआ। रिपोर्ट के अनुसार, जहाज पर लगभग 87लोग मारे गए जबकि श्रीलंका की नौसेना ने लगभग 30 नाविकों को बचाया और उन्हें गाले, श्रीलंका के अस्पताल में भर्ती कराया। ये भी पढ़ें:-पश्चिम एशिया में शांति कब-कैसे: चीन विशेष मध्यस्थता दूत भेजेगा, खाड़ी देशों की पहली आपात बैठक से UAE भी जुड़ा इस हमले से कैसे बढ़ी चिंता, ये भी समझिए बता दें कि यह हमला दर्शाता है कि अमेरिकी नौसेना अब भारतीय महासागर में भारी उपस्थिति बनाए हुए है। इस क्षेत्र में अमेरिका की पांचवीं फ्लेट, जो बहरीन में मुख्यालय रखती है, सबसे सक्रिय है। इसमें नाभिकीय पनडुब्बियां और बड़े युद्धपोत शामिल होते हैं। ऐसे में इस घटना ने भारत की सुरक्षा चिंता को बढ़ा दिया है। मामले में पूर्व नौसेना प्रमुख अधिरामन प्रकाश ने कहा कि यह दिखाता है कि ईरान-अमेरिका-इस्राइल युद्ध अब भारत के दरवाजे तक आ गया है। वहीं विशेषज्ञों का कहना है कि भारत को अपनी सुरक्षा और रणनीतिक हितों के लिए स्वतंत्र और समझदारी से कदम उठाने होंगे। भारतीय जलक्षेत्र में नहीं हुआ हमला हालांकि ध्यान देने वाली बात यह है कियह हमला भारतीय जलक्षेत्र में नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय जल में हुआ, जिससे भारत और अमेरिका के बीच कोई कूटनीतिक विवाद नहीं हुआ। इसके बावजूद, यह भारतीय महासागर के पास हुआ और इसमें भी कोई दोहराई नहीं है कि यह हमलाभारत के सामरिक हितों को प्रभावित कर सकता है। विशेषज्ञों ने तो यहां तक अनुमान लगाया है किइस हमले ने भारतीय महासागर को भी युद्ध की आग में खींच दिया है। ये भी पढ़ें:-क्या दरकने लगा MAGA का तिलिस्म: ईरान में बमबारी पर US में ट्रंप की आलोचना, पश्चिम एशिया पर किसने क्या कहा अमेरिका और भारत के बीच एक समझौता, समझिए अमेरिका और भारत के बीच लॉजिस्टिक्स एक्सचेंज मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट (LEMOA)2016 में हुआ था, जो संकट या संचालन के दौरान एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों तक पहुंच की अनुमति देता है। अमेरिकी पनडुब्बियों की उपस्थिति इस समझौते के तहत तेज तैनाती और समर्थन की ओर संकेत देती है। कुल मिलाकर इस हमले की वैश्विक महत्वता भी है। गौरतलब है कि ईरान और अमेरिका का युद्ध अब दक्षिण एशियाई जल क्षेत्रों तक फैल चुका हैऔर यह भारतीय हितों को सीधे प्रभावित कर सकताहै। इस दुर्लभ घटना ने यह भी दिखाया कि युद्धपोत टॉरपीडो से डूबाना अब 80 साल में चौथी बार हुआ है, जिससे इसकी गंभीरता और रणनीतिक महत्व और बढ़ जाता है।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Mar 05, 2026, 02:41 IST
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