रेवाड़ी के वार्ड नंबर 23 में बुनियादी सुविधाओं को लेकर हालात जस के तस

नगर परिषद के वार्ड नंबर 23 में पिछले कई वर्षों से बुनियादी सुविधाओं को लेकर हालात जस के तस बने हुए हैं। हैरानी की बात यह है कि इस साल वार्ड की आबादी में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई, बल्कि वार्ड का कुछ हिस्सा सीमांकन के बाद दूसरे वार्ड में शामिल हो गया है। इसके बावजूद विकास कार्यों के दावों और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है। वार्ड नंबर 23 में वर्तमान में कुल 3202 मतदाता दर्ज हैं, जिनमें 1460 महिला और 1742 पुरुष मतदाता शामिल हैं। आबादी स्थिर रहने के बावजूद क्षेत्र में सीवर, पेयजल और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं की स्थिति संतोषजनक नहीं है। वार्ड में केवल 700 मीटर सीवर लाइन ही बिछाई जा सकी है, जबकि अधिकांश गलियां आज भी सीवर सुविधा से वंचित हैं। स्थानीय पार्षद भूपेंद्र गुप्ता ने बताया कि वार्ड की कई गलियों में पिछले 10 वर्षों से न तो सीवर लाइन डाली गई है और न ही पानी की पाइपलाइन बदली गई है। बरसात के मौसम में जलभराव की समस्या आम है और गंदा पानी सड़कों व घरों के सामने जमा हो जाता है, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई बार शिकायतों के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका। सड़कों की स्थिति भी चिंताजनक है। पार्षद के अनुसार करीब पांच साल पहले वार्ड में लगभग 8 किलोमीटर सड़कें थीं, लेकिन अब यह सिमटकर करीब 5 किलोमीटर ही रह गई हैं। कई सड़कों पर जगह-जगह गड्ढे हो चुके हैं, जबकि कुछ हिस्सों में सड़कें पूरी तरह टूट चुकी हैं। इससे न केवल वाहन चालकों बल्कि पैदल चलने वालों को भी परेशानी उठानी पड़ रही है। सामुदायिक स्वास्थ्य भवन का निर्माण कार्य प्रगति पर: विकास कार्यों को लेकर पार्षद ने दावा किया कि वार्ड में अब तक करीब सवा तीन करोड़ रुपये के कार्य कराए गए हैं। हालांकि, इनमें से सड़क निर्माण पर केवल 1.80 लाख रुपये ही खर्च किए जा रहे हैं, जिसे स्थानीय लोग नाकाफी मान रहे हैं। दूसरी ओर, 88 लाख रुपये की लागत से एक सामुदायिक स्वास्थ्य भवन का निर्माण कार्य प्रगति पर है, जिसे वार्ड की बड़ी उपलब्धि बताया जा रहा है इसके अलावा, 67 लाख रुपये के अन्य विकास कार्यों को नगर परिषद की फाइनेंस कमेटी की बैठक में मंजूरी मिल चुकी है। इनमें कुछ गलियों की मरम्मत, नालियों की सफाई और अन्य छोटे कार्य शामिल बताए जा रहे हैं। हालांकि, इन कार्यों के धरातल पर उतरने को लेकर लोग अभी भी संशय में हैं। सीवर और पानी की लाइनें बदलने की उम्मीदें अधर में लटकी: अमृत योजना को लेकर भी वार्ड में नाराजगी है। पार्षद का कहना है कि 18 जनवरी 2021 से कार्यकाल शुरू होने के बाद अब तक अमृत योजना के तहत सरकार की ओर से एक रुपया भी नहीं मिला है। जबकि योजना के तहत 2023-24 में सर्वे जरूर कराया गया, लेकिन उसके बाद कोई ठोस कार्य शुरू नहीं हो सका। इससे वार्ड में सीवर और पानी की लाइनें बदलने की उम्मीदें अधर में लटकी हुई हैं। सामुदायिक भवन बनना अच्छी बात है, लेकिन उससे पहले बुनियादी सुविधाओं पर ध्यान दिया जाना चाहिए था। सीवर और पेयजल लाइनों को प्राथमिकता के आधार पर बदला जाए, ताकि रोजमर्रा की समस्याओं से राहत मिल सके। -मनीष, गली नंबर-2 वार्ड के पार्षद भूपेंद्र की तरफ से हमेशा से लोगों की मदद की जाती रही है। जनता का हर कार्य किया है। किसी भी कार्य को लेकर वह हमेशा तत्पर रहे हैं। मकान के पीछे एक गंदा नाला था, जब पार्षद को बताया गया तो उसका समाधान किया गया। -केके शर्मा, गली नंबर 1, रामपुरा रोड पार्षद की तरफ से तो काफी कार्य करवाए गए हैं, जो उनके स्तर पर थे। काफी कोशिशें की, जिससे सुधार भी काफी हद तक वार्ड में दिखा है।- डॉ. दिनेश, सती कॉलोनी वार्ड की कई गलियों में पिछले 10 वर्षों से न तो सीवर लाइन डाली गई है और न ही पानी की पाइपलाइन बदली गई है। कई बार शिकायतों के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका। कार्यकाल शुरू होने के बाद अब तक अमृत योजना के तहत सरकार की ओर से एक रुपया भी नहीं मिला है। जबकि योजना के तहत 2023-24 में सर्वे जरूर कराया गया, लेकिन उसके बाद कोई ठोस कार्य शुरू नहीं हो सका। -भूपेंद्र गुप्ता, पूर्व पार्षद, वार्ड नंबर 23

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Feb 09, 2026, 17:32 IST
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