मेरा गांव मेरी शान: बहुअकबरपुर गांव के महेंद्र सिंह रह चुके हैं फीजी देश के प्रधानमंत्री, साल 1902 में विदेश में चला गया था परिवार
शहर से 12 किलोमीटर दूर स्थित बहुअकबरपुर (भाऊ अकबरपुर) गांव की पहचान यहां का गौरवशाली इतिहास, शौर्य और आस्था है। करीब 900 वर्षों का इतिहास समेटे इस गांव की वर्तमान जनसंख्या लगभग 16000 है। जिसमें 8600 से अधिक मतदाता है। रोहतक-हिसार राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 9 पर स्थित यह गांव राजनीति के अलावा अपनी समृद्ध परंपराओं, सामाजिक एकता के रूप में जाना जाता है। रोहतक खंड की यह सबसे बड़ी पंचायत है। जिसमें सरपंच के अलावा 20 पंच हैं। गांव में रहने वाले परिवारों की संख्या लगभग 5000 है। यह गांव विधान सभा क्षेत्र महम और लोकसभा क्षेत्र रोहतक में शामिल है। गांव की खाप का नाम भाऊ अठगामा है। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय व राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय सहित गांव में दो सरकारी स्कूल हैं। दो स्कूल संस्था संचालित व दो अन्य निजी स्कूल हैं। गांव में नौ आंगनबाड़ी केंद्र हैं। गांव में तीन बैंक, पुलिस थाना व ताऊ देवीलाल के नाम से पार्क भी है। कृषि प्रधान गांव में अलग अलग समुदायाें की चौपालें हैं। गांव में छह तालाब है। यहां शिव मंदिर, हनुमान मंदिर, रविदास मंदिर, वाल्मीकि मंदिर, खाटू श्याम मंदिर, बाबा जीवन दास डेरा व अखाड़ाें के अलावा एक जिम भी हैं। 19 मई 1999 को फीजी देश के प्रधानमंत्री पद बने चौधरी महेंद्र सिंह बल्हारा मूल रूप से बहुअकबरपुर के ही थे। वे अंतरराष्ट्रीय लेबर यूनियन के प्रथम भारतीय अध्यक्ष भी रहे थे। ग्रामीण कहते हैं कि उनका परिवार 1902 में फीजी चला गया था। वर्ष 2004 में भारत सरकार ने उनको प्रवासी भारतीय सम्मान से सम्मानित भी किया था। नगर निगम रोहतक के मेयर रामअवतार वाल्मीकि का पैतृक गांव भी यही है।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Apr 21, 2026, 17:45 IST
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