जीआरपी थाने में होती रही मारपीट, कर्मियों की कार्यशैली पर सवाल

मुरादाबाद रेलवे के मुख्य हित निरीक्षक और उनके बेटे के साथ जीआरपी थाने में हुई मारपीट ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। रेलकर्मचारी संगठनों का आरोप है कि पुलिसकर्मियों की मिलीभगत के बिना यह मुमकिन नहीं है। थाने के बाहर जीआरपी मुर्दाबाद के नारे भी लगाए गए। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि वह रेल से संबंधित मामलों में जीआरपी का हस्तक्षेप सीमित करने की मांग करेंगे। साथ ही रेलवे कोर्ट के पास वकीलों के बैठने का स्थान निर्धारित कराने की मांग करेंगे। इसे लेकर डीआरएम व जीएम से वार्ता करेंगे। पीड़ित पक्ष के मुताबिक थाने के भीतर मारपीट करने वालों में वकील मनोज मिश्रा और उनके साथी अजय समेत तीन पुलिसकर्मी भी शामिल थे। पुलिस द्वारा दर्ज की गई एनसीआर में सिपाहियों द्वारा मारपीट का जिक्र नहीं है। इससे पीड़ित पक्ष व कर्मचारी संगठनों में असंतोष है। उरमू के कार्यकारी अध्यक्ष का कहना है कि पुलिसकर्मियों व वकीलों ने न सिर्फ मारपीट की बल्कि फोन छीनकर वीडियो भी डिलीट कर दिए। फोन को क्षतिग्रस्त कर दिया गया। बार-बार कहने के बावजूद रेलवे स्टेशन व जीआरपी थाने की सीसीटीवी फुटेज नहीं दिखाई गई। उरमू के मंडल मंत्री धर्मवीर सिंह और नरमू के मंडल अध्यक्ष मनोज शर्मा ने कहा कि रेलवे परिसर में कर्मचारी के साथ मारपीट हुई। इसके बावजूद पुलिस ने सख्त कार्रवाई में दिलचस्पी नहीं दिखाई। पुलिस को स्वत: संज्ञान लेकर प्राथमिकी दर्ज करनी चाहिए। रेलकर्मचारी संगठनों द्वारा दबाव बनाए जाने के बाद कार्रवाई का आश्वासन मिला। वहीं जब सवाल किया कि पुलिस के रहते थाने में मारपीट कैसे हुई तो सीओ अनिल वर्मा स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Dec 16, 2025, 21:14 IST
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