इतिहास, आस्था, शौर्य और विकास की समृद्ध पहचान है गरवा गांव
उपमंडल सिवानी से 38 किलोमीटर और जिला मुख्यालय भिवानी से 60 किलोमीटर दूर स्थित गांव गरवा लगभग 2300 मतदाताओं और करीब 5000 की आबादी वाला एक ऐतिहासिक व गौरवशाली गांव है जो अपनी समृद्ध परंपराओं, सामाजिक एकता और देशभक्ति की मिसाल के रूप में जाना जाता है। लगभग 700 वर्ष पूर्व निकटवर्ती गांव पातवान से आए स्वर्गीय गोपालराम लाखलाण ने इस गांव की स्थापना की। उस समय गांव की भूमि पर “खारिया कुआं” नाम से विख्यात एक कुआं मौजूद था जिसके आसपास झोपड़ियां थीं और जाट समाज के गुरु गोत्र के लोग निवास करते थे। इतिहास के अनुसार, खारिया कुआं के अलावा गांव में दो अन्य कुएं भी मौजूद थे जिनका निर्माण भौमसिंह बंजारा ने करवाया था। समय के साथ जब गांव में जाट, ब्राह्मण, बनिया, खाती, कुम्हार, लोहार, एससी और बीसी समाज के लोग बसने लगे, तब गुरु गोत्र के लोगों ने पलायन करना शुरू कर दिया। स्वर्गीय गोपालराम लाखलाण ने उन्हें रोकने का प्रयास किया, लेकिन जाते समय उन्होंने अपनी एक इच्छा रखी कि गांव का नाम उनके गोत्र के नाम पर रखा जाए। इसी के बाद गांव का नाम “गुरुआ” रखा गया जो समय के साथ परिवर्तित होकर “गरवा” हो गया। शिक्षा व मूलभूत सुविधाएं गांव में सरकारी विद्यालय दसवीं कक्षा तक संचालित है। इसके अलावा पशु अस्पताल, एससी और बीसी चौपाल तथा आंगनबाड़ी केंद्र जैसी सुविधाएं ग्रामीणों को उपलब्ध हैं।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Apr 19, 2026, 16:39 IST
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