गजराैला में गुरु तेग बहादुर शहीदी दिवस मनाया

गुरु तेग बहादुर शहीदी दिवस पर ज्ञानी अनूप सिंह ने सबद कीर्तन करते हुए कहा कि गुरु तेग बहादुर के चलत भयो जगत में शोक को सुन संगत निहाल हो गई। उन्होंने गुरु तेग बहादुर की शहादत बयां करते हुए कहा कि सनातन की रक्षा के लिए उनका बलिदान सबके लिए प्ररेणा का स्रोत रहेगा। गुरुद्वारा साध संगत चौपला पर गुरु तेग बहादुर शहीदी दिवस मनाया गया। इस दौरान ज्ञानी अनूप सिंह ने सबद कीर्तन व कथा विचार के माध्यम से उनके जीवन पर प्रकाश डाला। कहा उस समय औरंगजेब ने हिंदुओं को जबरन इस्लाम कबूल कराने का अभियान चला रखा था। उसके अत्याचार से तंग आकर कश्मीर के पंडित गुरु तेग बहादुर के पास पहुंचे और अपनी पीड़ा सुनाई तथा उसके अत्याचार से बचाने की गुहार लगाई। गुरु तेग बहादुर कश्मीरी पंडितों के कहने पर उनकी व सनातन धर्म की रक्षा के लिए आगे आए। औरंगजेब ने उनके सामने भाई मति दास, भाई दयाला, भाई सति दास को बड़ी बेरहमी से मौत के घाट उतरवा दिया, लेकिन इसके बाद भी गुरु तेग बहादुर ने इस्लाम कबूल नहीं किया। तब उनको भी शहीद कर दिया गया, लेकिन उनका बलिदान इतिहास में अमर हो गया। इस दौरान गुरुद्वारा प्रबंधक सरदार अमरजीत सिंह ने ज्ञानी अनूप सिंह को सरोपा भेंट कर सम्मानित किया। सरदार हरभजन सिंह ने कहा कि गुरु तेग बहादुर के बलिदान से सभी को मजलूमों और कमजोरों के साथ खड़े होने की सीख लेनी चाहिए। संगतों को लंगर छकाया गया। इस मौके पर दर्शन सिंह, तेजपाल सिंह, रजिंदर सिंह धारीवाल, सरदार गुरुचरण सिंह अजमानी, हरजीत सिंह, चरणजीत सिंह, राजन सिंह, बीबी रानी कौर, बीबी शशि कौर, बीबी जसमीत कौर आदि मौजूद रहे।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Nov 25, 2025, 20:28 IST
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