25 साल में पहली बार बीएचयू में ख्वातीन की तहकीकी पर संवाद, VIDEO

बीएचयू के महिला महाविद्यालय स्थित उर्दू अनुभाग में मंगलवार को “खवातीन और उर्दू अदब : ख़िदमात और रुझानात” विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी की शुरुआत हुई। मुख्य अतिथि प्रो. शहाबुद्दीन साक़िब ने कहा कि 25 साल के अरसे में खवातीन की तहकीकी पर कोई सेमिनार नहीं हुआ है। इन्होंने अब अफसाने (कथा-कहानियों) की दुनिया में पुरुषों को भी पीछे छोड़ दिया है। इसी तरह तहकीक जो बहुत मेहनत का काम है उसमें भी खवातीन बहुत आगे हैं। जिसमें आप वाहिदा बेगम का नाम ले सकते हैं। वहीं प्रो. अफ़ताब अहमद आफ़की ने कहा कि खवातीन के ख़िदमात को जिस तरह तवज्जो दिया जाना चाहिए। वह उर्दू अदब में अभी भी नहीं दिया जा रहा। मोहम्मद अली जौहर ने कहा कि शुरुआत में खवातीन अपने नाम से अपनी तकलीफ किसी पत्रिका में दारिज नहीं करवाती थी। आज उर्दू अदब में उर्दू लेखिकाओं का नाम फरामोश नहीं किया जा सकता। अब फिक्शन के साथ-साथ शायरी में भी उनकी उपस्थिति कम नहीं है। शिकवा रहा कि खवातीन को वह तवज्जो नहीं मिली प्रो.अफ़ताब अहमद आफ़की ने कहा कि अदब के हवाले से हमेशा यह शिकवा रहा कि खवातीन को वह तवज्जो नहीं मिली, चाहे अदब में हो या घर पर। सच्चाई यह है कि खवातीन और मर्द में अदब और इल्म के मामले में कोई अंतर नहीं है। संगोष्ठी के पहले दिन डॉ. नाज बेगम ने अतिथियों को मंच पर आमंत्रित किया। एमएमवी प्राचार्या प्रो. रीता ने इंनविजिबल वुमेन उपन्यास पर बात की।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Nov 19, 2025, 18:50 IST
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