शहीद सुखचैन सिंह अमर रहे के गूंजे नारे, अंतिम विदाई पर नम हुईं आंखें

कश्मीर के राजौरी में शहीद हुए सिरसा जिले के जवान सुखचैन सिंह का पार्थिव शरीर लेकर शनिवार को सेना की टुकड़ी पैतृक गांव कुताबढ़ पहुंची। घर पर अंतिम दर्शनों के दौरान भारत माता की जय, वंदेमातरम् और सुखचैन फौजी अमर रहे के नारे गूंज उठे। परिजनों ने नम आंखों से शहीद के अंतिम दर्शन किए। शहीद की पत्नी निर्मल कौर हाथ जोड़कर बोलीं, "हमें नहीं पता बॉक्स में कौन है। हमने तो अंतिम दर्शन किए हैं। सेना वालों को ही पता है कि बॉक्स में क्या है।" पार्थिव शरीर गांव पहुंचने के बाद परिजनों ने कुछ देर के लिए अंतिम यात्रा रुकवा दी। उन्होंने आरोप लगाया कि तीन दिन से कोई प्रशासनिक अधिकारी उनका हाल-चाल लेने तक नहीं पहुंचा। ऐलनाबाद डीएसपी ने एसपी से फोन पर बात करने की बात कही, लेकिन ग्रामीणों ने इससे इनकार कर दिया। करीब 30 मिनट तक अंतिम यात्रा रुकी रही। परिजनों ने शहीद के लिए एक करोड़ रुपये मुआवजे और सरकारी नौकरी की मांग की। उनका कहना था कि चुनाव के समय हर कोई पहुंच जाता है, लेकिन ऐसे समय में कोई उनकी सुध लेने नहीं आया। बाद में अपनी मांगों के लिए परिवार को कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। परिवार ने मांग की कि कोई जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचकर लिखित में आश्वासन दे। उन्होंने कहा कि लिखित आश्वासन मिलने तक अंतिम यात्रा आगे नहीं बढ़ाई जाएगी। हालांकि, बाद में ग्रामीणों ने परिवार को समझाकर अंतिम यात्रा शुरू करा दी।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Sep 05, 2026, 14:18 IST
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