मेरा गांव, मेरी शान: वीरों की धरती बादली, दो सौ जवान कर रहे देश की रक्षा, कई पीढ़ियों से कायम है सैन्य परंपरा

बादली। बादली गांव वीर योद्धा हरवीर सिंह गुलिया की जन्मस्थली के रूप में भी जाना जाता है। वर्ष 1398 में मात्र 22 वर्ष की आयु में उन्होंने तैमूर लंग के आक्रमण का डटकर मुकाबला किया। राव राणा देवपाल के नेतृत्व में गठित सर्वखाप सेना में वह उप-कमांडर रहे और युद्ध में अदम्य साहस का परिचय दिया। लोक इतिहास के अनुसार उन्होंने तैमूर लंग को सीधी चुनौती देकर उसे भारी क्षति पहुंचाई। युद्ध में वीरगति प्राप्त करने वाले हरवीर सिंह गुलिया आज भी क्षेत्र के लिए शौर्य, राष्ट्रभक्ति और बलिदान के प्रतीक माने जाते हैं। बादली गांव के लोग आज भी उनकी वीरता पर गर्व करते हैं। ब्रिगेडियर, कैप्टन, कई अधिकारी और सैकड़ों सैनिकों ने गांव का गौरव बढाया है। गांव अपनी गौरवशाली सैन्य परंपरा के लिए दूर-दूर तक जाना जाता है। देश सेवा का जज्बा यहां की पहचान बन चुका है। गांव से वर्तमान में करीब 200 से ज्यादा युवा भारतीय सेना के विभिन्न अंगों में सेवाएं दे रहे हैं, जबकि कई परिवार पीढ़ियों से सेना में भर्ती होकर राष्ट्र रक्षा का दायित्व निभा रहे हैं। कई परिवारों में तीन-तीन पीढियां सेना में भर्ती होकर देश सेवा के प्रति समर्पित रही है।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jul 08, 2026, 16:46 IST
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