Kishtwar Encounter: ठंड और अंधेरे के बीच जवानों ने आतंकियों का किया सफाया
जब दुनिया गहरी नींद में सो रही थी तब किश्तवाड़ के छात्रू की गगनचुंबी पहाड़ियों पर मौत और जिंदगी के बीच एक खामोश जंग लड़ी जा रही थी। यह कोई सामान्य ऑपरेशन नहीं था यह परीक्षा थी उस अटूट साहस की, जो माइनस 5 डिग्री के जमते तापमान और 1500 फीट से ज्यादा की ऊबड़-खाबड़ ऊंचाई पर भी डिगता नहीं है। कुदरत की कठिन परीक्षा और जांबाजों का संकल्प : छात्रू से करीब 8 किलोमीटर ऊपर, जहां ऑक्सीजन कम और घनी झाड़ियों का साया ज्यादा है वहां सुरक्षाबलों (सेना, सीआरपीएफ और पुलिस) का सामना सिर्फ आतंकियों से नहीं, बल्कि कुदरत के क्रूर मिजाज से भी था। बिछड़ और डोलगाम के बीच बहते उस बर्फीले नाले की गड़गड़ाहट के बीच, हमारे जवानों ने अपनी सांसें रोक रखी थीं। पिछले 20 दिनों से ये शिकारी (आतंकी) पहाड़ियों की ओट में छिपकर भाग रहे थे लेकिन बीती रात सुरक्षाबलों ने वह चक्रव्यूह रचा कि बच निकलने के सारे रास्ते बंद हो गए। घने पेड़ों व जमी बर्फ के बीच जहा एक गलत कदम सीधे गहरी खाई में ले जा सकता है, हमारे जवानों ने रेंगते हुए आतंकियों के करीब पहुंचने का जोखिम उठाया।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Feb 06, 2026, 14:46 IST
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