मेरा गांव, मेरी शान: 52 बंगलों वाला कोसली, 900 साल पुराना गांव आज भी अपनी पहचान पर कायम

गांव कोसली केवल एक सामान्य गांव नहीं, बल्कि अहीरवाल क्षेत्र के गौरव, वीरता और ऐतिहासिक विरासत की पहचान है। 52 बंगला कोसली, बांके कई हजार, घर-घर में चौधरी अर गली-गली सरदार कहावत इस गांव की समृद्ध परंपरा और सामाजिक प्रतिष्ठा को दर्शाती है। करीब 900 वर्ष पुराने इस गांव की पहचान आज भी उसके ऐतिहासिक 52 बंगलों, सैन्य परंपरा और धार्मिक आस्था से जुड़ी हुई है। पंच राजीव यादव ने बताया कि गांव की स्थापना लगभग 900 वर्ष पहले हुई थी। बताया जाता है कि गांव के बीड़ क्षेत्र में बाबा मुक्तेश्वरपुरी तपस्या करते थे। उसी दौरान शेखावटी के राजा कोसल सिंह यहां से गुजर रहे थे। रात होने पर उन्होंने यहां विश्राम किया। बाबा ने उन्हें यहीं बसने का आशीर्वाद देते हुए कहा था कि इस स्थान को कोई पराजित नहीं कर सकेगा। इसके बाद राजा कोसल सिंह ने यहां गांव बसाया और उनके नाम पर ही कोसल गोत्र की पहचान बनी। सरपंच रामकिशन जांगड़ा ने बताया कि इतिहास के पन्नों में दर्ज है कि इस गांव पर कई बार बाहरी आक्रमण हुए। पठानों, फिरोजपुर झिरका के नवाबों और जाटों ने गांव को जीतने का प्रयास किया, लेकिन हर बार गांव के लोगों ने बहादुरी से मुकाबला किया और दुश्मनों को पीछे हटना पड़ा। उस समय गांव के चारों ओर गहरी खाई बनाई गई थी, जिससे यह एक मजबूत किले जैसा दिखाई देता था। हालांकि समय के साथ उस खाई के निशान अब लगभग समाप्त हो चुके हैं।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: May 25, 2026, 17:14 IST
पूरी ख़बर पढ़ें »


मेरा गांव, मेरी शान: 52 बंगलों वाला कोसली, 900 साल पुराना गांव आज भी अपनी पहचान पर कायम #SubahSamachar