सीट का समीकरण: 2022 के चुनाव में शाहगंज में 20 साल बाद हारी सपा; महज 719 वोट से हुआ फैसला, ऐसा है इसका इतिहास

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी बिसात बिछनी शुरू हो गई है। प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों में से हर सीट पर राजनीतिक दल अपने-अपने समीकरण साधने में जुटे हैं। भाजपा जहां अपनी पकड़ बनाए रखने की कोशिश में है, वहीं विपक्षी दल भी अपने पुराने समीकरणों को नए सिरे से मजबूत करने में जुटे हैं। ऐसे में हम आपको यूपी की सभी विधानसभा सीटों का इतिहास, राजनीतिक सफर और चुनावी गणित बता रहे हैं। इसी कड़ी में आज चर्चा जौनपुर जिले की शाहगंज विधानसभा सीट की। आइए, जानते हैं इस सीट का पूरा सियासी गणित और इसका अब तक का इतिहास क्या रहा है। पहले जानते हैं शाहगंज जिले की सीटों के बारे में उत्तर प्रदेश में कुल 75 जिले हैं, जिनमें 403 विधानसभा सीटें आती हैं। इन्हीं में से एक जिला जौनपुर है। जिले में कुल नौ विधानसभा सीटें हैं। इनमें- बदलापुर, शाहगंज, जौनपुर, मल्हनी, मुंगरा बादशाहपुर, मछलीशहर, मड़ियाहूं, केराकत और जफराबाद शामिल हैं। 'सीट का समीकरण' की कड़ी में आज हम शाहगंज विधानसभा सीट की बात करेंगे। शाहगंज विधानसभा सीट वैसे तो साल 1951-52 में देश के पहले आम चुनाव में ही अस्तित्व में है, लेकिन उस समय यह क्षेत्र कई अलग हिस्सों में विभाजित था। हालांकि परिसीमन के बाद यह सीट साल 1957 में अपने नए स्वरूप में अस्तित्व में आई और इसके नए स्वरूप में सीट पर पहली बार 1957 में चुनाव कराए गए। शुरुआत में यह विधानसभा एक द्विसदस्यीय सीट थी, यानी यहां से दो विधायक चुने जाते थे। इस विधानसभा क्षेत्र के पहले विधायक कुंवर श्रीपाल और माता प्रसाद बने थे। शुरुआत में यह सीट अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित थी, हालांकि 2008 के परिसीमन के बाद इसे एक सामान्य सीट कर दिया गया।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Oct 06, 2026, 17:25 IST
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