टाइम मशीन: नायक और खलनायक, अंतर का अंत करते हालात
कभी-कभी इतिहास खुद ही न्याय करने में सबसे बड़ी बाधा बन जाता है। चुनाव बेहद मुश्किल होता है-जैसे वेनेजुएला। दुनिया जबर्दस्त पशोपेश में है। आखिर कोई कैसे राष्ट्रपति निकोलस मादुरो से सहानुभूति जताए, जिसने देश को लूटा, लाखों लोगों के पलायन की वजह बना। लेकिन ट्रंप संप्रभु विश्व व्यवस्था को तोड़कर रातों-रात जिस तरह मादुरो को कराकस से उठा लाए, उसको जायज कैसे कहा जाए वेनेजुएला संभावनाओं और दुर्भाग्य की ऐसी कहानी है, जहां नायक और खलनायक का अंतर खत्म हो जाता है। वेनेजुएला पूरी दुनिया के लिए 200 साल की सबसे बड़ी नसीहत है। आइए, बैठिए टाइम मशीन में, हम चलते हैं सबक सीखने टाइम के फ्लाइट पाथ पर नजर जमाइए तारीख है 1535। टाइम मशीन का पहला पड़ाव है क्यूबागुआ का आइलैंड। यह इलाका नुएवा काडिज है। यह लैटिन कैरेबियन में पहला यूरोपीय शहर है, जिसे स्पेनियों ने बसाया है। सामने नोट्स लिखते हुए खड़ा है स्पेनी इतिहासकार गोंजालो फर्नांडीज डी ओविएडो। ओविएडो के पास खड़ा एक बूढ़ा आदिवासी उसे अपने हाथ में रखा काला गाढ़ा द्रव्य दिखा रहा था। वह बता रहा है कि जब भी किसी शिकारी के पैर में गहरी चोट लगती है, वे इसी तेल से घाव भरते हैं। कुछ आदिवासी जमीन से रिसते काले तरल को नावों की दरारों में भर रहे थे। इससे नाव में पानी नहीं जाता है। स्पेनी सिपाही आदिवासी की बात सुनकर हंस रहे हैं, पर ओविएडो अपनी किताब जनरल एंड नेचुरल हिस्ट्री ऑफ द इंडीज में लिखेंगे-कुछ ही दिनों बाद जब एक नाविक का पैर सड़ने लगा और उसी तेल से उसकी जान बची, तो स्पेनिश सिपाही उसे चमत्कार कहने लगे। पहली बार यूरोप इस अनोखी चीज से मिल रहा है, जिसे क्रूड ऑयल का नाम बहुत बाद में मिलेगा। ओविएडो ने अपनी किताब में इस काले चिपचिपे पदार्थ को नया नाम दिया है-नेक्टर ऑफ क्यूबागुआ, यानी क्यूबागुआ की धरती का अमृत। ओविएडो ने अगली चिट्ठी में स्पेनी सम्राट चार्ल्स को लिख भेजा कि यह उनके गठिया का शर्तिया इलाज है। चार्ल्स घुटनों के दर्द से बेहाल हैं। यह 1539 का साल है। जहाज सांताक्रूज नेक्टर ऑफ क्यूबागुआ को लेकर स्पेन पहुंचा है, जहां से इसे राजधानी टॉलेडो भेजा जाएगा। यह लैटिन अमेरिकी क्रूड की पहली यूरोप यात्रा है। टाइम मशीन अब रफ्तार बढ़ाकर बीसवीं सदी में पहुंच रही है यह 1914 का साल है। सामने है मेने ग्रांडे। यहां जुमाके-1 कुएं से तेल का फव्वारा फूट रहा है। वेनेजुएला पर तानाशाह हुआन विसेंते गोमेज का शासन है। अब हम राजधानी कराकस पहुंच रहे हैं, इस समय तक गोमेज ने तेल की ताकत समझ ली है। ब्रिटिश, डच व अमेरिकी कंपनियों के अफसर कराकस की परिक्रमा कर रहे हैं। गोमेज तेल निकालने के लाइसेंस बेच रहा है और उसने अपनी सत्ता को तीन दशकों तक अमर कर लिया। यह दूसरे विश्वयुद्ध का दौर है और अमेरिका के लिए वेनेजुएला सबसे भरोसेमंद तेल आपूर्तिकर्ता है। कराकस चमकने लगा है, पर गांवों में भूख वही है। वेनेजुएला उस पुरानी कहावत का प्रमाण है कि तेल से शासक अमीर होते हैं और जनता गरीब। वह इस वक्त लैटिन अमेरिका का सबसे समृद्ध मुल्क है। अब यह 1958 का साल है। गोमेज के खिलाफ विरोध बढ़ रहा है। वेनेजुएला में सैन्य शासन खत्म हो रहा है और टाइम मशीन 1970 के दशक की तरफ बढ़ रही है। हम कराकस से सीधे बगदाद पहुंच गए हैं। वह सामने बड़े होटल के कमरे में बैठक चल रही है। कमरे में अरब और वेनेजुएला के नुमाइंदे हैं। वेनेजुएला के तेल मंत्री जुआन पाब्लो पेरेज अल्फोंसो बोल रहे हैं तेल अब कंपनियों का नहीं रहेगा, देशों का होगा। यह लीजिए, ओपेक के गठन का एलान हो गया है। अरब और लैटिन देशों ने तेल उद्योग से अमेरिकी-ब्रितानी कंपनियों, यानी सेवेन सिस्टर्स को खदेड़ना शुरू कर दिया है। यह 1976 का साल है। वेनेजुएला के तेल उद्योग का राष्ट्रीयकरण हो गया है और पीडीवीएसए का जन्म हो गया है, जो अगले कुछ वर्षों में बड़ा साम्राज्य बनेगी। वह अमेरिका में सिट्गो की खरीद करेगी। यूरोप में रिफाइनरी सौदे होंगे। टाइम मशीन के डायल पर साल दिख रहा है 1980 का। बाजार में तेल की भरमार है। इस ऑयल ग्लट में वेनेजुएला की पीडीवीएसए डूब रही है। देखते-देखते कर्ज बढ़ा और वेनेजुएला अचानक अमीर से गरीब बन गया है। यह 1988 का साल है। कराकस विरोध से खौल रहा है। राष्ट्रपति कार्लोस आंद्रेस पेरेज आईएमएफ से बेलआउट लेकर आए हैं। लेकिन शर्त है-सब्सिडी काटो, पेट्रोल महंगा करो और सरकारी खर्च घटाओ। आईएमएफ की शर्तें लागू हो गईं, बस का किराया बढ़ा, रोटी महंगी हुई। भीड़ उबल पड़ी। दुकानें लुटीं। सेना ने गोली चलाई। इसी भीड़ में एक युवा अफसर खड़ा है। नाम है ह्यूगो चावेज। इतिहास अब इस पर केंद्रित होगा। टाइम मशीन 1990 के दशक से गुजरते हुए 21वीं सदी की तरफ बढ़ रही है। फरवरी 1992 की अंधेरी सुबह लेफ्टिनेंट कर्नल, ह्यूगो चावेज सत्ता पलटने की कोशिश करते हुए जेल पहुंच गए, मगर जेल ने उसे परिवर्तन का प्रतीक बना दिया। 1998 में वोटों पर सवार होकर चावेज सत्ता में लौट आए हैं। चावेज ने तेल की कमाई को सामाजिक न्याय का औजार बनाया है। यहीं से अब वेनेजुएला बनाम अमेरिका की शुरुआत हो रही है। यह 2001 का साल है। चावेज ने कहा है कि वेनेजुएला का तेल अब वाशिंगटन की मर्जी से नहीं बिकेगा। चावेज ने पीडीवीएसए पर पकड़ बनानी शुरू की है, क्यूबा से हाथ मिलाया और ओपेक को फिर से मजबूत किया है। वाशिंगटन बुरी तरह खफा है। यह अप्रैल 2002 है। चावेज का तख्तापलट हो गया है। कारोबारी पेद्रो कारमोना ने खुद को राष्ट्रपति घोषित किया है। अमेरिका ने तुरंत समर्थन दिया। मगर 48 घंटे बाद चावेज फिर सत्ता में लौट आए हैं। अब टाइम मशीन की घड़ी में 2013 दिख रहा है। चावेज नहीं रहे। उनकी जगह निकोलस मादुरो हैं। वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें गिरी हैं, उत्पादन घटा है। वेनेजुएला गहरे आर्थिक संकट में है। मादुरो ने सत्ता बचाने के लिए सेना को तेल-धंधे में हिस्सेदारी दे दी है। विदेशी प्रतिबंधों के बीच गुप्त सौदे हुए हैं। करेंसी कचरा बन गई है। लाखों लोग देश छोड़ रहे हैं। अमेरिका मादुरो को अवैध कह रहा है। विश्व का सबसे बड़ा तेल समृद्ध मुल्क बदहाल हो गया है। टाइम मशीन वापस कराकस में उतर रही है। अमेरिका अब वेनेजुएला का मालिक है। उसका तेल अब ट्रंप की मर्जी से बिकेगा। इतिहास फिर लिख रहा है कि तेल शैतान की गंदगी है, जो इसे नहीं संभालता, उसे यह कंगाल और गुलाम बना देता है। फिर मिलते हैं अगले सफर पर
- Source: www.amarujala.com
- Published: Jan 18, 2026, 06:43 IST
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