ट्रंप प्रशासन को झटका: अदालत ने राज्यों से चुनाव संबंधी फंडिंग रोकने पर लगाई रोक, संघीय न्यायाधीश क्या बोले?
अमेरिका के वाशिंगटन डीसी में एक संघीय न्यायाधीश ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के अधिकारों पर एक बार फिर रोक लगाई है। यह अधिकार उन राज्यों से कुछ संघीय आतंकवाद विरोधी फंडिंग रोकने से संबंधित था, जो चुनाव प्रशासन की मांगों को पूरा नहीं करते थे। अदालतों ने बड़े पैमाने पर मतदान धोखाधड़ी के झूठे दावों को दर्शाने वाले प्रशासन के पिछले प्रयासों को बड़े पैमाने पर खारिज कर दिया है। ट्रंप प्रशासन की प्रतिक्रया क्या अमेरिकी जिला न्यायाधीश आमिर अली ने सोमवार को 24 पेज की राय में लिखा कि संघीय एजेंसियों के पास कांग्रेस से अनुदानों में ऐसी शर्तें जोड़ने का अधिकार नहीं था। उन्होंने कहा कि ये शर्तें अंतर्निहित अनुदान उद्देश्य से संबंधित होने की कानूनी सीमा को पूरा नहीं करती थीं। गृह सुरक्षा विभाग या उसकी उप-एजेंसी, संघीय आपातकालीन प्रबंधन एजेंसी (फेमा) ने टिप्पणी के अनुरोध पर तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। किस नियम को लेकर कानूनी लड़ाई अनुदान की शर्तों का मामला देश मेंचुनाव कैसे संचालित किए जातेहैं इससे जुड़ा है।ट्रंप प्रशासन ने चुनाव से जुड़ी कार्रवाईकी जो लंबे समय से राज्यों से जुड़ा मामला भी रहा है। मुकदमा दायर करने वाले राज्यों में-कोलंबस, ओहियो, नैशविले और डेविडसन काउंटी, टेनेसी, के अलावा एल पासो और हैरिस काउंटी, टेक्सास शामिल हैं। फेमा की आतंकवाद विरोधी अनुदान घोषणा में चुनाव से संबंधित जरूरतोंकी एक सूची भी शामिल है। इसमें ट्रंप प्रशासन नेकहा था कि राज्यों और शहरी क्षेत्रों के लिए 20 फीसदी अनुदान तब तक रोक दिया जाएगा, जब तक वे उनका पालन नहीं करते। कार्यक्रम में राज्यों और स्थानीय सरकारों के लिए 1 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक शामिल हैं। क्या थीं चुनाव संबंधी शर्तें राज्यों के लिए वस्तुओं की सूची में सभी पंजीकृत मतदाताओं और चुनाव कर्मियों की नागरिकता का सत्यापन शामिल था। जो स्थान वोटों की गिनती के लिए बारकोड या क्यूआर कोड का उपयोग करने वाले इलेक्ट्रॉनिक मतदान प्रणालियों का उपयोग करते हैं। उन्हें हाथ से चिह्नित कागजी मतपत्रों पर स्विच करने की योजना प्रस्तुत करनी होगी। हर क्षेत्राधिकार को यह दिखाना होगा कि वह परिणामों का ऑडिट करता है। FEMA के अधिकारों पर क्या सवाल उठे मुकदमे में, शहरों और काउंटियों ने कहा कि फेमा के पास इन शर्तों को लागू करने का कोई अधिकार नहीं था। यह न तो उसके शासी कानून के तहत था और न ही संविधान के तहत। कांग्रेस ने फेमा को आतंकवाद और साइबर हमलों से महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की रक्षा में मदद करने के लिए अधिकृत किया था। शहरों और काउंटियों ने लिखा कि फेमा को यह तय करने का अधिकार नहीं है कि कौन मतदान कर सकता है, मतपत्रों की गिनती कैसे की जानी चाहिए या राज्य मतदाता सूचियों का रखरखाव कैसे करते हैं। उन्होंने मुकदमे में कहा, "फेमा ने पहले कभी राज्यों और काउंटियों के चुनाव चलाने को विनियमित करने का दावा नहीं किया है।"
- Source: www.amarujala.com
- Published: Sep 29, 2026, 03:13 IST
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