Union Budget 2026: बजट के हर एक रुपये की पाई-पाई का हिसाब, आंकड़ों से समझिए क्या है कमाई-खर्च का पूरा गणित
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज लोकसभा मेंमोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल का तीसरा बजट पेश कर रही हैं।बजट पर पूरे देश की निगाहें टिकी हैं। पिछले वर्ष सरकार नेआयकर को लेकर बड़े एलान किए थे, जिससे मध्यम और वेतनभोगी वर्ग को राहत देने की बात कही थी।लोग अक्सर बजट को लेकर चर्चा तो करते रहे, लेकिन बजट में पैसा कहां से आता है और कहां जाता है, यह हिसाब ठीक से नहीं समझ पाते थे। आइए पिछले वर्ष के बजट के आंकड़ों से समझते हैं बजट के पाई-पाई का हिसाब। ये भी पढ़ें:मूडीज का बड़ा दावा:7.3% की रफ्तार से दौड़ेगी भारतीय अर्थव्यवस्था, इंश्योरेंस सेक्टर में आएगी बंपर तेजी सरकार की ओर से पेश किए गए बजट में आम लोगों के लिए क्या था, इसे सही तरीके से समझने के लिए उसके पाई-पाई के हिसाब को समझना जरूरी है। आइए पूर्व के आंकड़ों से समझते हैं सरकार पैसा कहां से लाती है और कहां खर्च करती है सरकार के पास आने वाले हर एक रुपये में कितना पैसा कहां से आया वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 01 फरवरी को 50 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का बजट पेश किया था। इस बजट को आधार बना कर देखें तो हम यह समझ सकेंगे कि बजट के हर एक रुपये का कितना पैसा कहां से आया और कहां गया एक रुपये का कितना पैसा कहां से आया बजट में साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, सरकार ने एक रुपये का 24 पैसा उधारी और अन्य प्रकार की देयताओं (Borrowings Other Liabilities) के जरिए जुटाया था। उधारी के बाद सरकार के खाते में सबसे ज्यादा राशि आयकर (Income Tax) से आई थी। इस मद से सरकार को एक रुपये के 22 पैसे मिले थे। इसके बाद माल और सेवा कर (GST) और अन्य करों की वसूली से सरकार को 18 पैसे से अधिक की आमदनी हुई थी। कंपनियों पर लगने वाले कर यानी निगम कर (Corporation Tax) के जरिए सरकार ने एक रुपये के 17 पैसे जुटाए थे। बजट 2024 के आंकड़ों के अनुसार, करों के अलावा अन्य स्रोतों (Non-Tax Receipts) से सरकार को एक रुपये के 9 पैसे मिले थे। वहीं, केंद्रीय उत्पाद शुल्क (Union Excise Duties) से 5 पैसे और सीमा शुल्क (Customs) से 4 पैसे की आमदनी हुई थी। उधार के अलावा अन्य स्रोतों से पूंजीगत प्राप्ति (Non-Debt Capital Receipts) के तहत सरकार को एक रुपये में 1 पैसा मिला था। एक रुपये का कितना पैसा कहां खर्च किया गया पिछले बजट के आंकड़ों के अनुसार, सरकार के पास आने वाले हर एक रुपये में से 20 पैसे ऋणों की ब्याज अदायगी (Interest Payments) में खर्च हुए थे। 22 पैसे करों और शुल्कों में राज्यों की हिस्सेदारी (States Share of Taxes and Duties) के तौर पर दिए गए थे। सरकार ने अपने पास आने वाले एक रुपये में से 16 पैसे केंद्रीय योजनाओं (Central Sector Schemes) पर खर्च किए थे। 8 पैसे राज्यों में केंद्र प्रायोजित योजनाओं (Centrally Sponsored Schemes) पर खर्च हुए थे। 8 पैसे रक्षा क्षेत्र (Defence) में खर्च किए गए थे। वित्त आयोग और अन्य मदों में भी 8 पैसे खर्च किए गए थे। आर्थिक सहायता (Subsidies) के लिए 6 पैसे, पेंशन (Pensions) के लिए 4 पैसे, और अन्य मदों (Other Expenditure) में सरकार के हर एक रुपये से 8 पैसे खर्च हुए थे।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Jan 19, 2026, 15:18 IST
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