रूसी मिसाइल-ड्रोन के राज खोलेगा यूक्रेन: लॉन्च किया 'ट्रॉफीलैब' प्लेटफॉर्म, सामने आएंगी हथियारों की कमजोरियां

रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच यूक्रेन ने ट्रॉफीलैब नाम से एक डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है। इसके तहत यूक्रेन युद्ध के मैदान से कब्जे में लिए गए आधुनिक रूसी हथियारों के गोपनीय तकनीकी दस्तावेज, ब्लूप्रिंट्स और उनकी कमजोरियां अपने अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों के साथ साझा करेगा। यूक्रेन के रक्षा मंत्री मिखाइलो फेदोरोव ने यह घोषणा करते हुए कहा कि युद्ध के मैदान से जब्त रूसी मिसाइल, ड्रोन या टैंक वॉर ट्रॉफी होने के साथ ही यह ज्ञान भी है कि दुश्मन के हथियार कैसे काम करते हैं। क्रेमलिन की जो तकनीक गोपनीय थी, वह अब खुली किताब बन चुकी है। ट्रॉफीलैब एक केंद्रीयकृत शोध का मंच है, जिसे यूक्रेन के खुफिया महानिदेशालय और सेना के अनुसंधान संस्थानों के समन्वय से तैयार किया गया है। फिलहाल इस डेटाबेस में रूसी हथियारों के 115 से अधिक लाइव सैंपल और 79 सैन्य श्रेणियां शामिल की जा चुकी हैं। इसमें रूसी मिसाइलें, ड्रोन, संचार प्रणालियां, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध उपकरण व बख्तरबंद वाहन शामिल हैं। सभी को नहीं मिलेगा एक्सेस यह पोर्टल आम लोगों के लिए उपलब्ध नहीं है, इस पर केवल सत्यापित उपयोगकर्ताओं को ही लॉग-इन की सुविधा मिलेगी। जिनमें नाटो और पश्चिमी सहयोगी देशों की सरकारें व रक्षा मंत्रालय शामिल हैं। साथ ही अंतरराष्ट्रीय व घरेलू रक्षा उपकरण निर्माता कंपनियां, सैन्य वैज्ञानिक, इंजीनियर और अनुसंधान संस्थान भी शामिल हैं। प्लेटफॉर्म से इंजीनियर डिजिटल ब्लूप्रिंट और वास्तविक रूसी हार्डवेयर को भौतिक रूप से जांचने के लिए अनुरोध भेज सकते हैं। इस कदम के गहरे कूटनीतिक-सामरिक मायने यूक्रेन के इस कदम के गहरे सामरिक व कूटनीतिक मायने हैं। अब तक पश्चिमी देशों को रूसी मिसाइलों व इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर प्रणालियों की आंतरिक बनावट का केवल अनुमान था। ट्रॉफीलैब के जरिए पश्चिमी रक्षा कंपनियां इन हथियारों में इस्तेमाल होने वाली फ्रीक्वेंसी, चिप्स और राडार गाइडेड प्रणालियों का सटीक अध्ययन कर सकेंगी। ये भी पढ़ें:US-Iran Deal:ईरानी फंड पर कतर संग काम कर रहा अमेरिका, हालिया शांति समझौते का हिस्सा है वित्तीय प्रोत्साहन रिवर्स-इंजीनियरिंग सैन्य क्षेत्र में अनुसंधान और विकास में वर्षों का समय और अरबों डॉलर खर्च होते हैं। ट्रॉफीलैब रक्षा क्षेत्र के स्टार्टअप्स के लिए ऐसी प्रयोगशाला की तरह काम करेगा, जिससे नए हथियारों के निर्माण में लगने वाला समय कम हो जाएगा। इस कदम के जरिए यूक्रेन ने पश्चिमी देशों के सामने एक मजबूत कूटनीतिक कार्ड भी खेला है। यूक्रेन यह संदेश दे रहा है कि वह पश्चिमी देशों से सिर्फ सैन्य और आर्थिक मदद नहीं ले रहा है, बल्कि बदले में उन्हें रूस की उस गुप्त सैन्य तकनीक का एक्सेस दे रहा है जिसे हासिल करने के लिए अमेरिकी और यूरोपीय खुफिया एजेंसियां दशकों से प्रयासरत थीं।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jun 21, 2026, 04:02 IST
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