एपल को मिला नया सीईओ: टिम कुक पद से देंगे इस्तीफा, कंपनी के हार्डवेयर प्रमुख जॉन टर्नस संभालेंगे कमान
एपल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) टिम कुक अपने पद से इस्तीफा देने जा रहे हैं। स्टीव जॉब्स के बाद उन्होंने यह पद संभाला था। अब उनका लगभग 15 साल का कार्यकाल खत्म हो रहा है। जॉन टर्नस बनेंगे एपल के नए सीईओ इस दौरान कंपनी का बाजार मूल्य बहुत तेजी से बढ़ा। आईफोन के दौर में एपल का मूल्य 3.6 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा हो गया। टिम कुक (65 वर्षीय) एक सितंबर से सीईओ के पद से हट जाएंगे। उनकी जगह कंपनी के हार्डवेयर इंजीनियरिंग प्रमुख जॉन टर्नस नए सीईओ बनेंगे। कंपनी के कामकाज में सीमित भूमिका निभाते रहेंगे कुक हालांकि, टिम कुक कंपनी से पूरी तरह नहीं हटेंगे। वह एपल में कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में जुड़े रहेंगे और कंपनी के कामकाज में भूमिका निभाते रहेंगे। यह बदलाव अमेजन के जेफ बेजोस और नेटफ्लिक्स के रीड हेस्टिंग्स की तरह है। उन्होंने भी सीईओ पद छोड़ने के बाद कंपनी में सीमित भूमिका निभाई थी। टिम कुक को स्टीव जॉब्स जैसी दूरदर्शिता वाला तकनीकी दिग्गज नहीं माना गया। लेकिन उन्होंने जॉब्स द्वारा बनाए गए आईफोन और अन्य तकनीकी नवाचारों का उपयोग किया। इसके जरिए उन्होंने एपल को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। एपल कंपनी 1990 के दशक में लगभग दिवालिया होने की स्थिति में थी। कुक के नेतृत्व में दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे मूल्यवान कंपनियों में शामिल हो गई। भारत में एपल पर सख्ती, लग सकता है 3.56 लाख करोड़ का जुर्माना उधर, आईफोन एप्स मार्केट में दबदबे वाली स्थिति का गलत इस्तेमाल करने के मामले में भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने एपल के खिलाफ जांच तेज करते हुए अंतिम सुनवाई की तारीख 21 मई तय कर दी है। यह कदम एपल की ओर से वित्तीय डाटा देने से लगातार इन्कार करने और जांच के निष्कर्षों पर उसकी आपत्तियों के बाद उठाया गया है। मामले में दोषी पाए जाने पर एपल पर 38 अरब डॉलर (करीब 3.56 लाख करोड़ रुपये) तक का भारी-भरकम जुर्माना लग सकता है। सीसीआई न अपने आदेश में क्या कहा भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग ने 8 अप्रैल के एक आदेश में कहा, एंटीट्रस्ट मामले में जांच के लिए एपल से कुछ वित्तीय जानकारियां मांगी गई थीं। लेकिन, अमेरिकी कंपनी अक्तूबर, 2024 से अब तक ये विवरण जमा करने में नाकाम रही। साथ ही, उसने दिल्ली हाई कोर्ट में भारत के एंटीट्रस्ट जुर्माना कानून को चुनौती दी है। सूत्रों का कहना है कि एंटीट्रस्ट जुर्माना कानून को चुनौती देने सहित एपल का रुख सीसीआई को तेजी से आगे बढ़ने के लिए मजबूर कर रहा है। नियामक एपल के इन कदमों को जांच में देरी करने की कोशिश के तौर पर देख रहा है। ये भी पढ़ें:अमेरिका-भारत व्यापार समझौते पर अंतिम मुहर जल्द, भारतीय प्रतिनिधिमंडल इस हफ्ते जाएगा वाशिंगटन मामला कहां से शुरू हुआ यह मामला 2021 में तब शुरू हुआ था, जब मैच ग्रुप्स और कई भारतीय स्टार्टअप्स ने एपल के कारोबारी तरीकों का विरोध किया था। मामले की जांच के बाद सीसीआई के जांचकर्ताओं ने 2024 में एक रिपोर्ट में कहा, एपल ने ऐप्स मार्केट में अपनी दबदबे वाली स्थिति का गलत फायदा उठाया। डेवलपर्स को अनिवार्य इन-एप पर्चेज (आईएपी) सिस्टम इस्तेमाल करने के लिए मजबूर किया। ये कदम बाजार में प्रतिस्पर्धा कम करते हैं। मामले से जुड़े वकीलों का कहना है कि अंतिम सुनवाई की तारीख तय होना इस बात का संकेत है कि सीसीआई अपना रुख सख्त कर रहा है। दुआ एसोसिएट्स में एंटीट्रस्ट पार्टनर गौतम शाही ने कहा, एपल के पास अब भी मौका है कि वह ऑडिटर के सर्टिफिकेट के साथ अपने वित्तीय विवरण जमा करे और सुनवाई के दौरान इन डाटा के आधार पर जुर्माने की रकम पर बहस करे, जिसे कंपनी के वैश्विक टर्नओवर के आधार पर तय किया गया है। अगर वह ऐसा करने में नाकाम रहती है, तो जुर्माने की रकम पर उसकी दलीलें सीमित हो जाएंगी।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Apr 21, 2026, 02:32 IST
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