Explainer: भारत ने घोली इंसानी जिदंगी में मिठास; कितना पुराना है गन्ने से गुड़ और चीनी तक पहुंचने का इतिहास?
जिस चीनी के बिना आज चाय, मिठाई और कई खाने-पीने की चीजें अधूरी लगती हैं, कभी वह दुनिया की सबसे दुर्लभ और महंगी वस्तुओं में शामिल थी। इसकी कहानी सिर्फ एक फसल या खाद्य पदार्थ की कहानी नहीं है। इसके साथ खेती का विकास, नई तकनीकें, समुद्री व्यापार, औपनिवेशिक विस्तार, गुलामी, वैज्ञानिक खोज और औद्योगिक क्रांति सब जुड़े हैं। आइए जानते हैं कि कब, कहां और कैसे शुरू हुई चीनी की कहानी गन्ने से शुरू हुई मिठास की कहानी इंडियन एग्रीकल्चरल रिसर्च इंस्टीट्यूट के मुताबिक करीब 8,000 ईसा पूर्व न्यू गिनी में स्थानीय लोगों ने गन्ने को घरेलू फसल के रूप में अपनाना शुरू किया। उस समय गन्ने से आज की तरह सफेद चीनी नहीं बनाई जाती थी। लोग गन्ने को सीधे चबाते थे और उसके मीठे रस का स्वाद लेते थे। धीरे-धीरे गन्ने की खेती और उसके इस्तेमाल का ज्ञान एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र तक पहुंचा। समुद्री व्यापारियों और यात्रियों के जरिए गन्ना दक्षिण-पूर्व एशिया, चीन और भारत तक पहुंचा। करीब 8,000 ईसा पूर्व से 600 ईस्वी के बीच गन्ने की खेती का दायरा लगातार बढ़ता गया। यहीं से गन्ने की कहानी में भारत की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। भारत में लोगों ने गन्ने को सिर्फ चबाने के बजाय उसके रस को निकालकर उसे लंबे समय तक सुरक्षित रखने के तरीके खोजे।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Aug 22, 2026, 18:45 IST
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