Chandigarh News: बुड्ढा दरिया प्रदूषण पर पीएसी की संत सीचेवाल को खुली बहस की चुनौती

-10 जनवरी 2026 को जनता के सामने तथ्यों पर टकराव का प्रस्ताव-डाइंग फैक्ट्रियों को बचाने का आरोप, नौ सवाल भेजकर मांगे सीधे जवाब---संवाद न्यूज एजेंसीलुधियाना। बुड्ढा दरिया को प्रदूषण मुक्त कराने के मुद्दे पर सक्रिय पब्लिक एक्शन कमेटी (पीएसी) ने राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल को खुली बहस की चुनौती दी है। कमेटी ने 10 जनवरी 2026 को सार्वजनिक मंच पर बहस के लिए उन्हें पत्र भेजते हुए कहा है कि पिछले दो दशकों से जारी आंदोलन को भटकाने के बजाय अब सच्चाई जनता के सामने लाई जाए।पीएसी ने आरोप लगाया कि बुड्ढा दरिया के सबसे बड़े प्रदूषण स्रोत डाइंग फैक्ट्रियों को लगातार संरक्षण दिया जा रहा है। जब भी डाइंग उद्योग पर सवाल उठते हैं, मुद्दे को डेयरियों के गोबर और घरेलू सीवरेज की ओर मोड़ दिया जाता है। कमेटी का कहना है कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के हालिया आदेशों से स्थिति स्पष्ट हो चुकी है, इसके बावजूद भ्रम फैलाया जा रहा है।डेयरियों पर कार्रवाई, फैक्ट्रियों पर चुप्पी क्यों पीएसी ने सवाल उठाया कि पिछले एक साल में संत सीचेवाल ने स्वयं जेसीबी चलाकर डेयरियों के अवैध कनेक्शन कटवाए, लेकिन उन्हीं क्षेत्रों में मौजूद डाइंग फैक्ट्रियों के कथित 40 और 50 एमएलडी क्षमता वाले सीईटीपी पाइपों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई, जो उनके द्वारा विकसित घाटों के आसपास बताए जाते हैं।लॉकडाउन बना सबसे बड़ासबूतकमेटी ने कोविड लॉकडाउन का हवाला देते हुए कहा कि उस दौरान फैक्ट्रियां बंद होते ही बुड्ढा दरिया का पानी साफ होने लगा था। यह इस बात का ठोस प्रमाण है कि सबसे जहरीला और काला पानी डाइंग उद्योग से ही छोड़ा जाता है।पीएसी ने बहस से पहले भेजे गए 9 अहम सवाल1. डाइंग का पानी खेती के लिए अनुपयुक्त होने के बावजूद खेती का मुद्दा क्यों उठाया जाता है, जबकि डीसी लुधियाना इसका हलफनामा एनजीटी में दे चुके हैं2. सीईटीपी वैध हैं या अवैध, और यदि वैध हैं तो इन्हें बंद करने के आदेश क्यों दिए गए3. 9 दिसंबर 2024 के एनजीटी आदेश के बाद भी डिस्चार्ज क्यों जारी है 4. डेयरियों पर सख्ती और डाइंग पर नरमी क्या भेदभाव नहीं5. बीओडी-सीओडी की तय सीमा कितनी बार पार हुई6. निकाली जा रही सिल्ट का वैज्ञानिक निपटान कहां हो रहा है7. गाद हटाने से भूजल प्रदूषण का खतरा तो नहीं8. ग्रीन-बफर जोन पर अब तक क्या कार्रवाई हुई9. लगाए गए डाइंग पाइप पर्यावरण मंजूरी के तहत वैध हैं या नहींजगह तय करने को मांगा जवाबपीएसी ने सवालों के त्वरित जवाब की मांग करते हुए कहा है कि इसके बाद बहस के लिए स्थान बुक किया जाएगा। कमेटी ने ईशमीत अकादमी, सर्किट हाउस, गुरु नानक ऑडिटोरियम या पंजाबी भवन को संभावित स्थल बताया है। पीएसी का कहना है कि पारदर्शी सार्वजनिक बहस ही बुड्ढा दरिया के स्थायी समाधान की राह खोलेगी।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jan 03, 2026, 18:58 IST
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