तस्करी के निर्देशक ने साझा किए एयरपोर्ट पर शूटिंग के अनुभव; इमरान की तारीफ में बोले- उन्होंने चुप रहकर..
राघव बताते हैं कि इस सीरीज की सबसे बड़ी ताकत इसकी रिसर्च है। एयरपोर्ट जैसे लाइव लोकेशन्स पर हुई शूटिंग ने इस कहानी को ज्यादा असल बनाया है। अमर उजाला से बातचीत में राघव ने बताया कि इस सीरीज को बनाना चुनौतीपूर्ण और जरूरी क्यों था जो कहानियां सुनीं, उन्हें वैसे ही दिखाना मुमकिन नहीं था ये कहानी पूरी तरह रियल गोल्ड स्मगलिंग नेटवर्क से निकली है। सच कहूं तो हमारी रिसर्च ने हमें खुद हिला कर रख दिया। हमने कई कस्टम अधिकारियों से बातचीत की और जो कहानियां सामने आईं, वो इतनी चौंकाने वाली थीं कि कई बार ये तय करना मुश्किल हो गया कि कौन सी सच्चाई दिखाई जाए और कौन सी छुपाई जाए सबसे बड़ा झटका तब लगा जब ये समझ आया कि स्मगलिंग सिर्फ गोल्ड तक सीमित नहीं है। ये एक पूरा बिजनेस मॉडल है, जिसमें अमीर लोग अपने स्टेटस और लाइफस्टाइल के लिए गैरकानूनी तरीकों का इस्तेमाल करते हैं। यहां तक कि अपने बच्चों के लिए लग्जरी चीजों के साथ-साथ एक्सोटिक जानवरों तक को मंगवाया जाता है। कस्टम वाले हर बार नए तरीकों से इन्हें पकड़ने की कोशिश करता है, जबकि स्मगलर्स हर बार नया रास्ता निकाल लेते हैं। बाहर से ये सब किसी थ्रिलर जैसा लगता है, लेकिन हकीकत में ये बेहद खतरनाक क्राइम की दुनिया है।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Jan 19, 2026, 22:45 IST
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