Supreme Court: अदालत मुस्लिम महिलाओं से जुड़ी याचिका पर सुनवाई के लिए सहमत, सरकार को नोटिस जारी; जानिए मामला

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को मुस्लिम समुदाय, खासकर दाऊदी बोहरा समुदाय में प्रचलित महिला जननांग विकृति (एफजीएम) या महिला खतना पर रोक लगाने की याचिका पर सुनवाई करने की अनुमति दी। जस्टिस बी वी नागरथना और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने केंद्र सरकार और अन्य पक्षकारों को नोटिस जारी किया है।सर्वोच्च न्यायालयअब इस याचिका पर केंद्र और अन्य पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आगे निर्णय लेगी। एनजीओ चेतना वेलफेयर सोसाइटी ने याचिका दायर की है, जिसमें कहा गया है कि एफजीएमइस्लाम का अनिवार्य हिस्सा नहीं है और यह बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन है। याचिका में बताया गया कि इस पर कोई स्वतंत्र कानून मौजूद नहीं है, लेकिन यह बचे को चोट पहुंचाने से संबंधित कई धाराओं (113, 118(1), 118(2), 118(3)) के तहत आता है। याचिका में बताया गया है कि पॉक्सोएक्ट के तहत भी किसी नाबालिग के जननांग को गैर-चिकित्सीय कारणों से छूना अपराध माना गया है। स्वास्थ्य और मानवाधिकार पर प्रभाव डब्ल्यूएचओ ने एफजीएमको लड़कियों और महिलाओं के मानवाधिकार का गंभीर उल्लंघन बताया है। याचिका में कहा गया है कि यह गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, जिससे संक्रमण, प्रसव संबंधी जटिलताएँ और अन्य शारीरिक नुकसान हो सकते हैं। यह यूनिवर्सल डिक्लेरेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स के तहत दी गई मूलभूत गारंटियों का भी उल्लंघन है।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Nov 29, 2025, 02:57 IST
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