Supreme Court: 'आर्थिक सुरक्षा खतरे में डालना भी आतंकी कृत्य', दिल्ली दंगा मामले में 'सुप्रीम' टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली दंगे से जुड़े मामले में आदेश में कहा कि गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत आतंकवादी कृत्य सिर्फ अंतिम क्रियान्वयन तक ही सीमित नहीं है। बल्कि इसमें साजिश रचना, लामबंदी करना और आर्थिक सुरक्षा खतरे में डालने जैसे कृत्यों को अंजाम देने में लिप्त रहना भी शामिल है। जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने कहा, यूएपीए की धारा-15 के अनुसार, भारत की एकता, अखंडता, सुरक्षा, आर्थिक सुरक्षा या संप्रभुता को खतरे में डालने वाला हर कृत्य आतंकवादी कृत्य है। ऐसा कृत्य, जो भारत में लोगों या किसी भी वर्ग में आतंक फैलाने या इसकी संभावना के इरादे से किया गया हो। कानून का उद्देश्य आतंकवाद की परिभाषा को हथियारों के प्रयोग तक सीमित करना नहीं था। इसमें सिर्फ साधन पर ही जोर नहीं दिया गया है, बल्कि कृत्य के उद्देश्य, इरादे और प्रभाव पर भी जोर दिया गया है। 142 पन्ने के आदेश में पीठ ने कहा कि संसद ने जानबूझकर किसी भी अन्य प्रकार के माध्यम से अभिव्यक्ति का प्रयोग किया है। इसे निरर्थक नहीं माना जा सकता। इस प्रकार, विधिक जोर सिर्फ साधन पर नहीं, बल्कि कृत्य के उद्देश्य, इरादे और प्रभाव पर भी है। यूपीए के तहत आतंकी कृत्य में आवश्यक आपूर्ति में व्यवधान उत्पन्न करना भी शामिल है, जिससे आर्थिक असुरक्षा और नागरिक जीवन में अस्थिरता पैदा होती है। भले ही इस प्रक्रिया में हिंसा न हुई हो। ये भी पढ़ें:-Mexico: 'मुझे नहीं दिखता कार्रवाई का खतरा', ट्रंप की धमकी के बाद मेक्सिको की राष्ट्रपति शीनबाम का बड़ा बयान सिर्फ आरोपों की गंभीरता पर लंबी प्री-ट्रायल हिरासत उचित नहीं दिल्ली दंगों में आरोपी गुलफिशा फातिमा को जमानत देते हुए शीर्ष कोर्ट ने कहा कि सिर्फ आरोपों की गंभीरता पर लंबी प्री-ट्रायल हिरासत दंडात्मक रूप ले लेती है। फातिमा की भूमिका कथित मास्टरमाइंड उमर खालिद व शरजील इमाम से भिन्न है। फातिमा ने स्वतंत्र कमान, संसाधनों का नियंत्रण या रणनीतिक पर्यवेक्षण का प्रयोग नहीं किया। पीठ ने पाया कि सह आरोपियों नताशा नरवाल व कलिता को समान आरोपों में पहले बेल मिल चुकी है, ऐसी स्थिति में फातिमा को जेल में रखना समानता के सिद्धांत के विरुद्ध होगा। कोर्ट ने फातिमा, मीरन हैदर, शिफा-उर-रहमान, सलीम खान और शादाब अहमद को दो-दो लाख रुपये के निजी मुचलके और दो स्थानीय जमानतदारों के साथ सशर्त जमानत दी है। कोर्ट में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू और आरोपियों के लिए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी, सिद्धार्थ दवे, सलमान खुर्शीद और सिद्धार्थ लूथरा ने दलीलें रखीं। जेल ही मेरी जिंदगी, बेल पाने वालों के लिए खुश हूं : उमर दंगों की साजिश से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट से जमानत हासिल करने में नाकाम रहने वाले उमर खालिद ने कहा कि अब जेल ही उसकी जिंदगी है और वह मामले में अन्य आरोपियों की जमानत अर्जी मंजूर होने से खुश है। खालिद ने यह बातें अपनी दोस्त बनोज्योत्सना लाहिड़ी से कही। बनोज्योत्सना ने सोशल मीडिया में यह जानकारी देते हुए कहा कि उमर अन्य आरोपियों को जमानत मिलने से खुश हैं। एक पोस्ट में उन्होंने लिखा, उमर ने कहा- जिन लोगों को जमानत मिली है, उनके लिए मैं बहुत खुश हूं। बहुत राहत मिली है। मैं कल मुलाकात के लिए आऊंगी, इस पर उमर ने कहा- ठीक है, आ जाना। अब यही जिंदगी है। उमर के पिता बोले- यह दुर्भाग्यपूर्ण उमर खालिद की जमानत याचिका खारिज होने पर पिता एसक्यूआर इलियास ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है। सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट से बाहर आने पर पत्रकारों के सवालों पर इलियास ने कहा, कुछ नहीं कहना। यह दुर्भाग्यपूर्ण है। फैसला सामने है और मुझे कुछ नहीं कहना है। शरजील के चाचा बोले-हैरान हूं शरजील को जमानत नहीं मिलने पर उनके चाचा ने हैरानी जताई। बिहार के जहानाबाद में पत्रकारों से बात करते हुए शरजील ने कहा कि वह फैसले का सम्मान करते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि शरजील को आखिरकार जमानत मिल जाएगी। भाजपा बोली-टुकड़े-टुकड़े गैंग के समर्थन के लिए कांग्रेस मांगे माफी उमर और शरजील की जमानत याचिका खारिज होने पर भाजपा ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने फैसले को विपक्षी दल के चेहरे पर करारा तमाचा बताया। आरोप लगाया कि कांग्रेस और उसका ईकोसिस्टम इन पोस्टर बॉयज को निर्दोष बताकर देश विरोधी ताकतों का समर्थन कर रहा था। पार्टी ने मांग की है कि कांग्रेस को टुकड़े-टुकड़े गैंग के समर्थन के लिए देश से माफी मांगनी चाहिए। भाजपा ने सवाल किया कि क्या अब विपक्षी दल दंगे में जान गंवाने वाले अंकित शर्मा और रतन लाल जैसे पीड़ितों के परिवारों से क्षमा मांगेंगे। ये भी पढ़ें:-Venezuela: वेनेजुएला के अंतरिम राष्ट्रपति के तौर पर डेल्सी रोड्रिगेज ने लिया शपथ, मादुरो-फ्लोरेस को बताया नायक बिना ट्रायल जेल में रखना मौलिक अधिकारों का उल्लंघन : विपक्ष भाकपा (माले), माकपा और राजद ने न्यायालय के फैसले पर सवाल उठाते हुए इसे न्याय के सिद्धांतों के विपरीत बताया। विपक्षी नेताओं का कहना है कि पांच साल से बिना ट्रायल के जेल में रखना मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। विपक्ष ने न्याय प्रणाली में दोहरे मापदंड का आरोप लगाते हुए कहा कि एक तरफ राजनीतिक असहमति जताने वाले बिना सुनवाई जेल में हैं, दूसरी ओर दुष्कर्म के दोषी राम रहीम को 15वीं बार पैरोल दी गई है। नेताओं ने यूएपीए के दुरुपयोग पर चिंता जताते हुए सभी राजनीतिक कैदियों की रिहाई की मांग की है।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jan 06, 2026, 07:56 IST
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