Srinagar: घाटी में अलगाववाद को फिर जिंदा करने की साजिश, क्रिप्टो हवाला के जरिये फंडिंग; जांच में खुलासा

सुरक्षा एजेंसियों ने जम्मू-कश्मीर में अलगाववाद व आतंकवाद को फिर से सक्रिय करने की नई साजिश का खुलासा किया है। एजेंसियों के अनुसार अब विदेशी फंडिग के लिए पारंपरिक हवाला की जगह क्रिप्टो हवाला नेटवर्क इस्तेमाल किया जा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि इससे गंभीर चिंताएं पैदा हो गई हैं और सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट हैं। अधिकारियों का कहना है कि इन गुप्त फंडों का मकसद अलगाववादी तत्वों को नई जान देना और केंद्र शासित प्रदेश में राष्ट्र विरोधी बयानबाजी को फिर से भड़काना है जिसे पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों ने लगभग खत्म कर दिया है। यह नेटवर्क देश की वित्तीय निगरानी व्यवस्था को चकमा देकर बिना पहचान के विदेशी पैसा घाटी में पहुंचा रहा है। अधिकारी ने बताया कि जम्मू-कश्मीर पुलिस ने सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर विस्तृत अध्ययन किया। इसमें चीन, मलेशिया, म्यांमार और कंबोडिया जैसे देशों में लोगों की पहचान की गई जो केंद्र शासित प्रदेश में लोगों को निजी क्रिप्टो वॉलेट बनाने का निर्देश दे रहे थे जिन्हें पहचान से बचने के लिए वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (वीपीएन) का उपयोग करके सेट किया जाता है। इसके लिए किसी पहचान सत्यापन की आवश्यकता नहीं होती है। पुलिस ने घाटी में वीपीएन के इस्तेमाल पर पहले ही रोक लगा दी है क्योंकि हाल ही में क्रिप्टो वॉलेट में रजिस्ट्रेशन के मामले बढ़ रहे थे। वीपीएन आतंकवादियों और अलगाववादियों के लिए पकड़े जाने से बचने का एक आसान तरीका है। अधिकारियों ने बताया कि विदेशी हैंडलर सीधे इन प्राइवेट वॉलेट में क्रिप्टोकरेंसी भेजता है जिससे फंड बिना किसी रेगुलेटेड फाइनेंशियल संस्था के शामिल हुए लोकल कंट्रोल में आ जाता है और वॉलेट होल्डर दिल्ली या मुंबई जैसे बड़े शहरों में जाकर अनरेगुलेटेड पीयर-टू-पीयर ट्रेडर्स से मिलता है और तय रेट पर कैश में क्रिप्टो बेचता है। अधिकारियों ने कहा कि इससे विदेशी पैसा बिना ट्रेस किए जाने वाले कैश के रूप में लोकल इकॉनमी में आ जाता है। इस नेटवर्क की कुंजी म्यूल अकाउंट्स का इस्तेमाल है जो पार्किंग अकाउंट होते हैं जो ट्रांजेक्शन को लेयर करते हैं। सिस्टम को चालू रखने के लिए सिंडिकेट्स ने एक स्ट्रक्चर्ड कमीशन सिस्टम बनाया है जहां ऐसे अकाउंट होल्डर को हर ट्रांजेक्शन पर 0.8 से 1.8 प्रतिशत तक कमीशन मिलता है। अधिकारियों ने बताया कि म्यूल अकाउंट आम लोगों के होते हैं जो कमीशन के वादे से मोटिवेट होते हैं और उन्हें भरोसा दिलाया जाता है कि उनकी भूमिका सुरक्षित है। उनके बैंक अकाउंट का पूरा कंट्रोल जिसमें नेट बैंकिंग यूजरनेम और पासवर्ड भी शामिल हैं स्कैमर को सौंप दिया जाता है।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jan 19, 2026, 05:44 IST
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