Hindi Ghazal: सुमन, ख़ुशबू, घटा, मनहर पवन से जी नहीं भरता
सुमन, ख़ुशबू, घटा, मनहर पवन से जी नहीं भरता भ्रमर प्यासा ही रहता है, चमन से जी नहीं भरता हैं' जबसे छू गए मुझको तेरे होठों के दो मिसरे न जाने क्या हुआ शेर-ओ-सुख़न से जी नहीं भरता सिनेमा में सभी हैं ढूँढ़ते खुशियाँ मगर हम तो लगे 'गोदान' में रहते, 'गबन' से जी नहीं भरता सुबह से शाम तक माँ बस उसी चेहरे को तकती है कभी भी चाँद के टुकड़े ललन से जी नहीं भरता वो सोते-जागते हैं देखते सपने विदेशों के मेरा तो अपनी मिट्टी से, वतन से जी नहीं भरता वो कल जब मिल गया बाजार में तो पूछ हम बैठे अमाँ दिखते नहीं हो, क्या दुल्हन से जी नहीं भरता अगर सच में मुहब्बत है तो इतनी बात समझा कर तलब जब रूह की हो तो बदन से जी नहीं भरता ~ शिवेन्द्र मिश्रा हमारे यूट्यूब चैनल कोSubscribeकरें।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Apr 25, 2026, 18:05 IST
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