शकील बदायूंनी: छेड़ो न मुझे मैं कोई दीवाना नहीं हूँ
दुनिया की रिवायात से बेगाना नहीं हूँ छेड़ो न मुझे मैं कोई दीवाना नहीं हूँ इस कसरत-ए-ग़म पर भी मुझे हसरत-ए-ग़म है जो भर के छलक जाए वो पैमाना नहीं हूँ रूदाद-ए-ग़म-ए-इश्क़ है ताज़ा मिरे दम से उनवान-ए-हर-अफ़्साना हूँ अफ़्साना नहीं हूँ इल्ज़ाम-ए-जुनूँ दें न मुझे अहल-ए-मोहब्बत मैं ख़ुद ये समझता हूँ कि दीवाना नहीं हूँ मैं क़ाएल-ए-ख़ुद्दारी-ए-उल्फ़त सही लेकिन आदाब-ए-मोहब्बत से तो बेगाना नहीं हूँ है बर्क़-ए-सर-ए-तूर से दिल शोला-ब-दामाँ शम-ए-सर-ए-महफ़िल हूँ मैं परवाना नहीं हूँ है गर्दिश-ए-साग़र मिरी तक़दीर का चक्कर मोहताज-ए-तवाफ़-ए-दर-ए-मय-ख़ाना नहीं हूँ काँटों से गुज़र जाता हूँ दामन को बचा कर फूलों की सियासत से मैं बेगाना नहीं हूँ लज़्ज़त-कश-ए-नज़्ज़ारा 'शकील' अपनी नज़र है महरूम-ए-जमाल-ए-रुख़-ए-जानाना नहीं हूँ हमारे यूट्यूब चैनल कोSubscribeकरें।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Mar 27, 2026, 16:37 IST
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