मुद्दा: सड़क सुरक्षा बने एक जन आंदोलन, हर सड़क-हर शहर और हर गांव तक पहुंचाया जाए

आचार्य दीप चंद भारद्वाज के अनुसार, सूर्य के उत्तरायण होने का प्रतीकात्मक अर्थ है-अंधकार से प्रकाश की ओर यात्रा। सड़क दुर्घटनाओं के संदर्भ में हम इसे वर्षों से छाया घना कोहरा छंटने की शुरुआत मान सकते हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा दिसंबर, 2025 में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ की गई सड़क-सुरक्षा समीक्षा बैठक इस बात का स्पष्ट संकेत है कि अब सड़क सुरक्षा को केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि परिणाम-आधारित मिशन के रूप में आगे बढ़ाया जाएगा। सड़क दुर्घटनाओं की लगातार बढ़ती संख्या यह बताती है कि वर्तमान स्थिति में समस्त प्रदेश की सरकारों को कड़े प्रयास करने होंगे। जागरूकता, एवं सड़क इंजीनियरिंग से पहले एक कुशल सरकार ही सुरक्षा, नियमों का पालन, उसके लिए प्रशासन की प्रतिबद्धता, एवं जवाबदेही और सड़क सुरक्षा कार्यक्रमों की सफलता सुनिश्चित कर सकती है। इसके लिए एक ठोस एक्शन प्लान तैयार किया जाना जरूरी है, जिसमें उठाए जाने वाले प्रत्येक कदम, संबंधित विभागों की जिम्मेदारी और समयसीमा स्पष्ट रूप से निर्धारित हों। सरकार का पहला मिशन यह होना चाहिए कि सभी नागरिकों को यातायात नियमों की स्पष्ट जानकारी हो। इसके लिए सड़क पर यातायात चिह्नों, लेन चिह्नांकन, जेब्रा क्रॉसिंग और गति-सीमा का स्पष्ट उल्लेख हो, और उनका बराबर रख-रखाव किया जाए। सड़कों पर नियमित अंतराल पर यह अंकित किया जाए कि कौन-सी लेन किस प्रकार के वाहनों के लिए है। सड़क पर तैनात कर्मचारियों को समय-समय पर यातयात नियमों का प्रशिक्षण और उनसे जुड़ी नई जानकारियां देना अनिवार्य है। एक्शन प्लान के पहले छह से 12 महीनों में प्रवर्तन पर विशेष बल दिया जाए। दुर्घटना के मुख्य कारणों जैसे-तेज गति, गलत दिशा में ड्राइविंग व मोबाइल फोन के प्रयोग आदि पर प्राथमिकता से कार्रवाई हो। गंभीर उल्लंघन के मामलों में किसी भी प्रकार की ढिलाई न बरती जाए। चालानों का विवरण घटनास्थल पर डेट एंट्री की जाए, ताकि दोबारा उल्लंघन करने वालों के लाइसेंस समाप्त करने जैसी सख्त कार्रवाई की जा सके। तकनीकी प्रणालियों और यातायात प्रबंध प्रणाली की क्षमताओं का पूर्ण उपयोग हो। ट्रैफिक पुलिस और आरटीओ पर पूरा बोझ डालना व्यावहारिक नहीं है। मुख्यमंत्री के सुझावानुसार, उनकी सहायता के लिए, पुलिस कर्मी के संरक्षण में, होमगार्ड, डिफेंस कर्मी और शिक्षित बेरोजगार युवाओं को जोड़ा जाए। इनमें महिलाओं की पर्याप्त भागीदारी भी सुनिश्चित की जाए। इन्हें रोड सेफ्टी एंबेसडर के रूप में पहचान और सम्मान दिया जाए। आरटीओ और ट्रैफिक पुलिस विभाग में सड़क सुरक्षा से जुड़े अलग अनुभाग बनाए जाएं। इनके लिए अलग से सरकारी कर्मी, संसाधन और स्पष्ट दायित्व तय हों। उनके लिए चालान या राजस्व नहीं, बल्कि दुर्घटनाओं में कमी लाना मुख्य लक्ष्य बनाया जाए। सड़क या उसके आसपास की किसी भी ऐसी स्थिति, जिससे दुर्घटना की आशंका बढ़ती हो, के लिए व्यक्तियों/विभागों की स्पष्ट जिम्मेदारी तय की जाए। घने और तेज यातायात वाले क्षेत्रों में पैदल यात्रियों के लिए संकेत लाइटें (पेडेस्ट्रियन लाइट) लगाई जाएं, और सुरक्षित पार पथ बनाए जाएं। स्थानीय स्तर पर नियमित सड़क नियम जागरूकता, और सुरक्षित ड्राइविंग प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जाएं। इनमें कॉलोनियों, पंचायतों, नगर पालिकाओं, आवासीय समितियों, गैर-सरकारी संस्थाओं, सरकारी कार्यालयों और निजी संस्थानों की भागीदारी सुनिश्चित हो। इसमें पंजीकृत ड्राइविंग स्कूल की सेवाएं भी ली जा सकती हैं। इसके अलावा, जिला स्तर पर एक नोडल अधिकारी नामित किया जाए, जो विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करे। इसके कार्यान्वयन की नियमित समीक्षा भी हो। स्थानीय समाचार पत्रों और सोशल मीडिया के माध्यम से हर माह की गई कार्रवाइयों, अच्छे सड़क व्यवहार के उदाहरणों और जुर्माने की जानकारी जनता तक पहुंचाई जाए। इसी क्रम में व्यावहारिक नवाचार एवं सड़क सुरक्षा के समाधान भी आमंत्रित किए जाएं। इससे आम नागारिकों में जागरूकता, कानून के प्रति सम्मान, एवं सड़क-सुरक्षा अभियान में भागीदारी बढ़ेगी। सड़क सुरक्षा लंबे समय से उपेक्षित विषय रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में यह अवसर है कि इसे जन आंदोलन का रूप दिया जाए। प्रशासनिक इच्छाशक्ति और नागरिक सहभागिता के साथ सड़क सुरक्षा को हर सड़क, हर शहर और हर गांव तक पहुंचाया जा सकता है। यह आवश्यक होगा कि शासन स्तर पर नामित एक वरिष्ठ अधिकारी या मंत्री की पूरे सड़क सुरक्षा प्रोग्राम के प्रति अकेली जिम्मेदारी हो। मुख्यमंत्री का राज्य की जनता को संबोधन (योगी की पाती, 12 जनवरी, 2026) शासन की इस विषय पर सतत् निगरानी का स्पष्ट आश्वासन है। सड़क सुरक्षा की अपेक्षित दशा, और उत्तर प्रदेश में अच्छे परिणामों के बीच का फासला वास्तव में ज्यादा लंबा नहीं है।- लेखक नेशनल रोड सेफ्टी काउंसिल के सदस्य हैं।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jan 19, 2026, 06:17 IST
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