Kangra News: अस्पताल में संक्रमण का जोखिम, पहचान के लिए विशेषज्ञ ही नहीं
धर्मशाला। क्षेत्रीय अस्पताल धर्मशाला में लंबे समय से माइक्रोबायोलॉजिस्ट (सूक्ष्मजीव विज्ञानी) की तैनाती नहीं हो सकी है। यह केवल एक रिक्त पद का मामला नहीं, बल्कि हजारों मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ है। संक्रमण की पहचान करने वाली आंखें न होने से अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर और नवजात शिशु देखभाल केंद्र जैसे अति-संवेदनशील क्षेत्र अब इन्फेक्शन के हॉटस्पॉट बनने की कगार पर हैं।बिना माइक्रोबायोलॉजिस्ट के अस्पताल की पूरी जांच प्रणाली पंगु हो चुकी है। बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के खून, बलगम और पस की कल्चर जांच नहीं हो पा रही है। नतीजा यह है कि डॉक्टर यह पहचान ही नहीं पा रहे कि बीमारी बैक्टीरिया से है या घातक फंगस से। सबसे डरावना पहलू यह है कि एंटीबायोटिक सेंसिटिविटी टेस्ट के अभाव में मरीजों को दवाएं केवल अनुमान के आधार पर दी जा रही हैं। यह न केवल मरीज के ठीक होने की प्रक्रिया को धीमा कर रहा है, बल्कि शरीर में दवा प्रतिरोध जैसे बड़े खतरे को भी न्योता दे रहा है। अस्पताल के भीतर फैलने वाले संक्रमण को रोकने के लिए कोई इन्फेक्शन कंट्रोल पॉलिसी धरातल पर नहीं है। यदि किसी वार्ड या लेबर रूम में कोई घातक वायरस या बैक्टीरिया पनपता है तो माइक्रोबायोलॉजिस्ट के बिना अस्पताल प्रशासन को इसका पता तब चलेगा जब स्थिति नियंत्रण से बाहर हो चुकी होगी।ये है माइक्रोबायोलॉजिस्ट का काममाइक्रोबायोलॉजिस्ट का काम संक्रामक रोगों के कारण जानने और उनके उपचार में मदद करना है। साथ ही डॉक्टर को सही इलाज चुनने में सहायता करना है। अस्पताल में फैलने वाले संक्रमण पर नजर रखना भी उन्हीं का काम होता है। इन्फेक्शन कंट्रोल पॉलिसी बनाना और उसे लागू करना भी उन्हीं का दायित्व होता है।अस्पताल में माइक्रोबायोलॉजिस्ट का पद खाली चल रहा है। इसके बारे में सरकार को समय-समय पर अवगत करवाया जा रहा है। किसी भी अस्पताल में संक्रमण की पहचान कर उसकी रोकथाम के लिए माइक्रोबायोलॉजिस्ट बेहद जरूरी होता है। - डॉ. अनुराधा शर्मा, एमएस, क्षेत्रीय अस्पताल धर्मशाला।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Jan 07, 2026, 19:27 IST
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