राम मंदिर चढ़ावा चोरी साजिश: टिन्नू की शह पर सुभाष ने बनाया गिरोह, आंखें मूंदे रहे पदाधिकारी; पार होती गई रकम
राम मंदिर चढ़ावा चोरी के पीछे बड़ी साजिश थी। संगठित गिरोह की तरह करोड़ों का गबन किया गया। टिन्नू यादव की शह और उसके लोग थे, जो उसके इशारे पर काम करते थे। वहीं गणना इंचार्ज सुभाष श्रीवास्तव ने पूरा गिरोह तैयार किया। ट्रस्ट के पदाधिकारी आंखें मूंदे रहे। यह मिलीभगत थी या लापरवाही, जांच पूरी होने पर पता चलेगा। गिरोह आसानी से करोड़ों रुपये पार करता रहा। पुलिस की तफ्तीश में पूरा खेल धीरे-धीरे उजागर हो रहा है। चंपत और अनिल मिश्रा की भूमिका की जांच जारी है। दरअसल, रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू पर चंपत राय का हाथ था। वह ट्रस्ट या किसी अन्य इकाई का कोई पदाधिकारी या सदस्य नहीं था, लेकिन उसका हस्तक्षेप मंदिर प्रबंधन के प्रत्येक कार्य में रहता था। उसकी पूरी हनक रहती थी। यहां तक कि सुरक्षाकर्मी भी उसके आने-जाने पर किसी तरह का सवाल नहीं उठाते थे। इस दबदबे का फायदा पूरे खेल में उठाया गया। गणना इंचार्ज सुभाष श्रीवास्तव ने टिन्नू के साथ मिलकर साजिश रची। फिर टिन्नू ने अपने बंदे यानी अन्य आरोपियों को साथ में शामिल किया। उसके बाद रकम पार करने का सिलसिला शुरू हुआ, जो कई वर्षों तक चलता रहा। धीरे धीरे बढ़ेगी रिकवरी जब एसआईटी का गठन नहीं हुआ था तभी चर्चा थी कि ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने संदिग्धों को पकड़कर पूछताछ की थी। उनक निशानदेही पर करीब तीन करोड़ रुपये बरामद किए हैं। हालांकि पुलिस ने गिरफ्तारी के दौरान करीब 70 लाख रुपये बरामद किए हैं।सूत्रों ने बताया कि जैसे जैसे अन्य आरोपी गिरफ्तार किए जाएंगे वैसे वैसे रिकवरी भी बढ़ती जाएगी। बैंक वालों का जाता था हिस्सा पूरे खेल में बैंक अधिकारी और कर्मचारी शामिल रहे। टिन्नू और सुभाष इन बैंक वालों को एक तय हिस्सा दिया करते थे। सूत्रों ने बताया कि कई बार बैंक कर्मियों ने खुद भी रकम सीधे पार की है, जिसके कुछ साक्ष्य भी मिले हैं। ट्रस्ट को आरोपियों के पिता का नाम व पते तक की जानकारी नहीं राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की एफआईआर को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। एफआईआर में किसी भी आरोपी के पिता का नाम व पता नहीं लिखा गया है। सवाल है कि क्या ट्रस्ट के पास अपने ही कर्मियों के बारे में पूरी जानकारी नहीं रहती है। वहीं दूसरी तरफ केस में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम लगाया गया है, मतलब इसमें कोई न कोई सरकार कर्मचारी भी आरोपी है। वह बैंक का है। फिर भी उसको नामजद न करके अज्ञात कर दिया गया। इसके पीछे की मंशा सवाल खड़ा कर रही है। एआईआर में कुल आठ नामजद आरोपी हैं। इसमें अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव व रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू नामजद हैं। तहरीर के सधे हुए शब्द, निर्देश ऊपर से मिले प्रकरण में पीएमओ से निगरानी जारी है। उसके पीछे की वजह है कि जो ट्रस्ट गठित की गई थी वह केंद्र सरकार ने की थी। इसलिए पीएमओ को रिपोर्ट भी भेजी गई है। वहीं पीएमओ के अधिकारियों ने भी अपने स्तर से जांच की है।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Jun 27, 2026, 06:54 IST
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