राजेंद्र यादव की कविता- घायल प्रतीक्षा है
दीवारों से लटके फ़िल्मी अभिनेता हैं आँखें मिचकाती ट्रैफ़िक की लाइट है ख़ुशबू की सर सर में इठलाती चालें हैं बहसीली मेज़ों पर धुएँ के छल्ले है बस की मुड़ी टिकट खुँसी बेहद सुस्त घड़ी है परकटी चीलों-से मँडराते पंखे हैं उफ़, कितना शोर है। कैसी दिव्य शांति है! लेकिन इस सबके पार, इस सबके पीछे, रह-रह कर चौंकती, घायल प्रतीक्षा है पागल प्रतीक्षा है! हमारे यूट्यूब चैनल कोSubscribeकरें। लिंक पर क्लिक करें और जुड़ें अमर उजाला काव्य के व्हाट्सएपचैनल से https://whatsapp.com/channel/0029VaXoA27A89Mp96alfc2o
- Source: www.amarujala.com
- Published: Oct 27, 2026, 19:39 IST
राजेंद्र यादव की कविता- घायल प्रतीक्षा है #Kavya #Kavita #RajendraYadav #HindiPoems #SubahSamachar
