पुलवामा हमले के 7 साल: आतंक के बदलते चेहरे की चुनौती, बदली सुरक्षा व्यवस्था से नकेल; अब संयुक्त रणनीति पर काम

पुलवामा हमले के बाद सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय को बेहतर बनाने पर फोकस किया गया। पांच अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 और 35-ए हटने के बाद प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव हुए। पुलिस सीधे गृह मंत्रालय के अधीन आई। पहले जहां अलग-अलग रणनीतियां बनती थीं, वहीं अब संयुक्त रणनीति पर काम शुरू हुआ। पुलिस, सेना और अर्धसैनिक बलों के बीच इनपुट साझा करने और ऑपरेशन की संयुक्त योजना पर जोर दिया गया। बढ़ते समन्वय का असर ही है कि पुलवामा जैसे हमले को दोहराने की 16 साजिशों को एक वर्ष के भीतर नाकाम किया जा सका। आईईडी हमलों की कई कोशिशें विफल की गईं और आतंकी नेटवर्क पर शिकंजा कसा गया। सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर डॉ. विजय सागर धीमान बताते हैं कि पुलवामा हमले और अनुच्छेद 370 हटने के बाद जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव आया। स्थानीय स्तर पर हस्तक्षेप कम हुआ और ओजीडब्ल्यू नेटवर्क व आतंक समर्थकों पर कार्रवाई तेज हुई। संपत्तियों की जब्ती और कुर्की जैसे कदम उठाए गए। सुरक्षा एजेंसियों के बीच तालमेल मजबूत हुआ है और पाकिस्तान की गतिविधियों पर पैनी नजर रखी जा रही है।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Feb 14, 2026, 10:29 IST
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