यूपी: गंगा को माइक्रो प्लास्टिक प्रदूषण से बचाने का प्रोटोकॉल, हॉटस्पॉट की होगी पहचान; 8 संस्थानों का सहयोग
गंगा में बह रहे पांच मिलीमीटर तक के आकार वाले माइक्रोप्लास्टिक प्रदूषण पर निगरानी और रोकथाम के लिए पहला प्रोटोकॉल जारी किया गया है। बीएचयू सहित आठ संस्थानों की ओर से तैयार इस प्रोटोकॉल के तहत वैज्ञानिकों की टीम गंगा में प्लास्टिक प्रदूषण की निगरानी, हॉट-स्पॉट की पहचान और प्लास्टिक के बहाव के रास्तों का पता लगाएगी। इसके आधार पर प्लास्टिक प्रदूषण कम करने के संभावित उपायों पर केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय को सुझाव दिए जाएंगे। प्रोटोकॉल के तहत प्लास्टिक प्रदूषण प्रबंधन से जुड़े डीपीआर, परियोजनाओं और शोध प्रस्तावों की समीक्षा भी की जाएगी। साथ ही पॉलिसी फ्रेमवर्क, नई तकनीकों और समुदाय आधारित प्रयासों के लिए संबंधित मंत्रालयों और हितधारकों के साथ समन्वय किया जाएगा। नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित नौवें इंडिया इंटरनेशनल वाटर वीके के उद्घाटन सत्र में इस प्रोटोकॉल को लॉन्च किया गया। बीएचयू के रसायन शास्त्र विभाग के डॉ. कृपा राम ने काशी में किए गए शोध के आधार पर इस इस प्रोटोकॉल का तैयार करने में योगदान दिया। उन्होंने बताया कि वैज्ञानिकों की ओर से विकसित पहला नदी मॉनिटरिंग प्रोटोकॉल तैयार किया है। माइको प्लास्टिक गंगा की मछलियों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा रहा है। भारतीय दूध और खाने-पीने की चीजों में भी हर जगह मौजूद है। फूड चेन के जरिए ये इंसानी शरीर में पहुंच जाते हैं। इससे सूजन, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और हार्मोनल गड़बड़ियां हो रहीं हैं।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Oct 02, 2026, 21:07 IST
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