Sonipat News: मां की विरासत को हरियाली में संजोया, 25 साल से पौधों की सेवा में जुटीं रजनी माकिन

सोनीपत। भागदौड़ भरी जिंदगी और कंक्रीट के बढ़ते जंगल के बीच एल्डिको काउंटी, कुमासपुर निवासी सेवानिवृत्त प्राचार्य रजनी मल्होत्रा माकिन ने अपने घर को हरियाली के ऐसे स्वर्ग में बदल दिया है जहां प्रकृति मुस्कुराती है। फूलों की खुशबू जीवन में सकारात्मक ऊर्जा घोलती है और पौधों के बीच मानसिक शांति का अहसास होता है। 25 वर्ष से बागवानी को अपना जुनून बना चुकी रजनी के घर में आज करीब 300 गमले उनकी प्रकृति के प्रति अटूट निष्ठा और प्रेम की कहानी बयान करते हैं। रजनी बताती हैं कि बागवानी का संस्कार उन्हें उनकी स्वर्गीय माता दमयंती मल्होत्रा से विरासत में मिला। बचपन में वह अपनी मां को सुबह-सुबह पौधों की सेवा करते, उन्हें पानी लगाते और प्यार से उनकी देखभाल करते हुए देखा करती थीं। उनकी मां मधुर गायन की शौकीन थीं और बगीचे में घूमते हुए पौधों को गीत सुनाया करती थीं। उनका मानना था कि पौधे भी परिवार का हिस्सा होते हैं। यही कारण था कि टूटे हुए कप-प्यालों में भी पौधे लगा दिए जाते थे और घर आने वाले मेहमानों को विदाई के समय पौधे भेंट किए जाते थे। मां का यही प्रकृति प्रेम रजनी के जीवन का सबसे बड़ा प्रेरणास्रोत बन गया।मोगरे की खुशबू आज भी ताजा कर देती है बचपन की स्मृतियांरजनी के मायके के आंगन में मोगरा, मोतिया और कई तरह के फूलों वाले पौधे थे। शाम ढलते ही मोगरे की सुगंध पूरे घर को महका देती थी। वह कहती हैं कि वह खुशबू आज भी उनके मन को तरोताजा कर देती है और मां की यादों को जीवंत कर देती है। रजनी का मानना है कि पौधे केवल मिट्टी और पानी से नहीं, बल्कि प्रेम, धैर्य और समर्पण से बढ़ते हैं। उन्होंने अपनी मां से प्रेरणा लेकर खुरपी और मिट्टी को जीवन का साथी बनाया और बागवानी को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना लिया। वह कहती हैं कि पौधों का पालन-पोषण बच्चों की तरह होता है जिनकी निरंतर देखभाल और स्नेह जरूरी है।300 गमलों में सजी है रंग-बिरंगी हरियालीरजनी की बगिया में जेड प्लांट, मनी प्लांट, स्नेक प्लांट, एलोवेरा, क्रोटन, गुड़हल, स्पाइडर प्लांट, गुलाब, ड्रेसीना, मॉन्स्टेरा, पर्पल हार्ट और चाइना डॉल प्लांट सहित अनेक प्रजातियों के पौधे लहलहा रहे हैं। वह मौसम के अनुसार फूलों और सब्जियों की खेती भी करती हैं और जैविक रूप से उगाई गई सब्जियों का आनंद लेती हैं।वेस्ट से बेस्ट का अनूठा संदेशरजनी पर्यावरण संरक्षण को जीवन का हिस्सा मानती हैं। पुराने पर्स, जूतियां, प्लास्टिक और कांच की बोतलें, मिट्टी के बर्तन और अन्य अनुपयोगी वस्तुओं को वह सुंदर गमलों का रूप देकर उनमें पौधे लगाती हैं। उनकी यह पहल लोगों को कचरे के सदुपयोग और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देती है। रजनी के पति प्रो. सजीव कुमार माकिन जो दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय से सेवानिवृत्त प्रोफेसर हैं उनके इस शौक में बराबर के सहभागी हैं। दोनों दिन की शुरुआत पौधों की देखभाल से करते हैं। रजनी कहती हैं कि पौधों के बीच बिताया गया समय उनके लिए मेडिटेशन के समान है। हर घर में दो पौधे लगाने का दिया संदेशघरेलू कचरे से जैविक खाद तैयार करने वाली रजनी मल्होत्रा माकिन लोगों से अपील करती हैं कि प्रत्येक परिवार को कम से कम तुलसी और एलोवेरा के दो पौधे अवश्य लगाने चाहिए। उनका मानना है कि प्रकृति से जुड़ना, स्वयं से जुड़ने के समान है और आने वाली पीढि़यों को स्वच्छ, स्वस्थ और प्रदूषणमुक्त वातावरण देना हम सभी का नैतिक दायित्व है। फोटो : : सोनीपत में कुमासपुर के पास स्थित एल्डिको काउंटी में अपने घर के आंगन में लगाए पौधे म

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jun 28, 2026, 18:44 IST
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